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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव की याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी की चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव की याचिका को खारिज कर दिया है। महिला का तर्क था कि उसने पहले तीन बच्चों के लिए छुट्टी नहीं ली, लेकिन कोर्ट ने नियमों का हवाला देते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। जानें इस मामले में क्या हुआ और क्या हैं मैटरनिटी बेनेफिट ऐक्ट के तहत अधिकार।
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हाई कोर्ट का फैसला

उत्तर प्रदेश की एक सरकारी कर्मचारी ने मैटरनिटी लीव के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाल ही में, कोर्ट ने महिला को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि चौथे बच्चे के लिए उन्हें मैटरनिटी लीव नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इस स्थिति में कोई छूट नहीं है। महिला का कहना था कि उसने पहले तीन बच्चों के लिए कभी भी मैटरनिटी लीव नहीं ली, इसलिए उसे इस बार 6 महीने की छुट्टी मिलनी चाहिए।


याचिका का विवरण

संभल जिले में कार्यरत शशि कुमारी ने छुट्टी की मांग की थी, जिसे स्थानीय ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि चौथे बच्चे के लिए उन्हें 6 महीने की मैटरनिटी लीव नहीं मिल सकती। इस निर्णय के खिलाफ शशि कुमारी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रानी चौहान ने 7 अगस्त को अपना फैसला सुनाया।


सरकार का विरोध

राज्य सरकार के वकील ने शशि कुमारी की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि चौथे बच्चे के लिए किसी भी कर्मचारी को मैटरनिटी लीव देने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कोर्ट से अपील की कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए।


कानूनी तर्क

शशि कुमारी के वकील ने तर्क दिया कि उसने पहले तीन बच्चों के लिए कभी भी मैटरनिटी लीव नहीं ली, इसलिए वह इस बार इसकी हकदार हैं। उन्होंने BEO के निर्णय को कानून के खिलाफ बताया। हालांकि, राज्य सरकार ने शशि के दावे को गलत ठहराते हुए कहा कि वह पहले भी मैटरनिटी लीव ले चुकी हैं। इस पर हाई कोर्ट ने माना कि मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता है।


मैटरनिटी बेनेफिट ऐक्ट, 1961

यह ध्यान देने योग्य है कि मैटरनिटी बेनेफिट ऐक्ट, 1961 के तहत महिलाओं को पहले या दूसरी बार मां बनने पर कुल 26 हफ्तों की छुट्टी मिलती है, जिसमें उन्हें पूरी सैलरी मिलती है। यह नियम सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में लागू होता है। इसके लिए आवश्यक है कि महिला ने पिछले एक साल में कम से कम 80 दिन उस संस्था में काम किया हो। तीसरे बच्चे के लिए भी 12 हफ्ते की पेड लीव दी जाती है।