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गोबरधन योजना: स्वच्छ ऊर्जा के लिए बायोगैस का उत्पादन बढ़ाने की पहल

गोबरधन योजना के तहत सरकार ने बायोगैस के उत्पादन को बढ़ाने और CNG-PNG में इसके मिश्रण की योजना बनाई है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने, स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन और किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए है। जानें इस योजना के तहत क्या-क्या किया जाएगा और इसके लाभ क्या होंगे।
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गोबरधन योजना का महत्व

पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का मुद्दा देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार ने इससे होने वाले किसी भी नुकसान से इनकार किया है। हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत CNG और PNG में बायोगैस का मिश्रण किया जाएगा। यह प्रक्रिया 3 प्रतिशत से शुरू होगी और 2028-29 तक इसे 5 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 23,731 करोड़ रुपये की लागत वाली गोबरधन योजना को मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आत्मनिर्भर बनेंगे, स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त होगी और देश ऊर्जा के क्षेत्र में प्रगति करेगा। इसके साथ ही, किसान भी ऊर्जा सुरक्षा में भागीदार बनेंगे।


गोबरधन योजना का उद्देश्य

इस योजना के अंतर्गत कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन बढ़ाने और उसे CNG-PNG में मिलाने की योजना है। सरकार का लक्ष्य गैस के आयात में कमी लाना और गोबर जैसे कच्चे माल का उपयोग करके स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करना है। इससे पशुपालकों, किसानों और छोटे व्यवसायियों को भी लाभ होगा। इसी कारण सरकार इससे संबंधित उद्योगों को लोन देने के लिए तैयार है। इसके अलावा, कचरा प्रबंधन, आय के नए स्रोत विकसित करने और खाद उत्पादन बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।


गोबरधन योजना की प्रक्रिया

जैसा कि योजना के नाम से स्पष्ट है, इसका उद्देश्य गोबर को धन में परिवर्तित करना है। सरकार का मानना है कि ऑर्गेनिक कचरे का उपयोग स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक विकास के लिए किया जाना चाहिए। हरा कचरा और गोबर, जो अक्सर फेंक दिए जाते हैं, का उपयोग बायोगैस यानी CBG बनाने में किया जाएगा। इसके लिए किसानों से गोबर और हरा कचरा खरीदा जाएगा।


बायोगैस का उत्पादन कैसे होता है?

बायोगैस का उत्पादन खेती से निकलने वाले कचरे, जानवरों के गोबर, और अन्य ऑर्गेनिक कचरे का उपयोग करके किया जाता है। इन कचरों को इकट्ठा करके साफ किया जाता है और फिर एक ऐसे टैंक में रखा जाता है जहां ऑक्सीजन नहीं होती। वहां बैक्टीरिया इस कचरे को तोड़कर बायोगैस का निर्माण करते हैं, जो मुख्यतः मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड का मिश्रण होती है।


सरकार की योजनाएँ

सरकार ने नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी स्कीम यानी गोबरधन के लिए 23,731 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। यह योजना 2026-27 से शुरू होकर 2035-36 तक चलेगी। इस योजना के तहत, गैस को साफ करके और अपग्रेड करके CBG तैयार किया जाएगा, जिसे CNG और PNG में मिलाया जाएगा।


प्लांट लगाने वालों को सहायता

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रीनफील्ड CBG प्रोजेक्ट लगाने वालों को प्रति टन प्रति दिन 2 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह सहायता प्लांट लगाने के साथ-साथ कच्चे माल की खरीद और अन्य कार्यों के लिए भी होगी।


लक्ष्य और अपेक्षाएँ

सरकार का पहला लक्ष्य CBG के उत्पादन को 10 गुना बढ़ाना है। इससे आयात में कमी आएगी और स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा। प्राइवेट प्लेयर इस क्षेत्र में प्रवेश करेंगे, जिससे उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।