दिल्ली की अदालत ने जैगुआर लैंड रोवर को ग्राहक की शिकायत पर दोषी ठहराया
उपभोक्ता अदालत का निर्णय
दिल्ली की एक उपभोक्ता अदालत ने जैगुआर लैंड रोवर इंडिया और उसके डीलर को एक ग्राहक की शिकायत में लापरवाही का दोषी पाया है। यह मामला एक नई लग्जरी डिफेंडर एसयूवी से संबंधित है। ग्राहक ने अदालत में शिकायत की थी कि गाड़ी की डिलीवरी में लगभग 9 महीने की देरी हुई और इसके बाद भी गाड़ी में लगातार समस्याएं आती रहीं। गाड़ी ने 800 किलोमीटर भी नहीं चलाया था कि उसे बार-बार वर्कशॉप ले जाने की आवश्यकता पड़ी। अदालत ने सख्त निर्णय लेते हुए कंपनी और डीलर को निर्देश दिया है कि या तो गाड़ी को बदलकर नई दें या ग्राहक को 1.57 करोड़ रुपये वापस करें।
डिलीवरी में देरी और समस्याएं
यह गाड़ी फेना प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 2023 में डीलर के माध्यम से बुक की गई थी, जिसमें जुलाई में डिलीवरी का आश्वासन दिया गया था। लेकिन डीलर समय पर गाड़ी नहीं दे सका और बार-बार नई तारीखें देता रहा। अंततः गाड़ी नवंबर 2023 में मिली, जब बुकिंग के 9 महीने बीत चुके थे। इसके अलावा, ऑर्डर की गई एक्सेसरीज भी गाड़ी में नहीं लगी थीं।
डिलीवरी के बाद की समस्याएं
गाड़ी की डिलीवरी के बाद भी उसमें लगातार समस्याएं आ रही थीं। इसमें इंजन की गड़बड़ी, असामान्य कंपन और चेक इंजन की वॉर्निंग जैसी दिक्कतें सामने आईं। कई बार गाड़ी अचानक रास्ते में बंद भी हो गई।
जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की बेंच ने कहा कि एक नई लग्जरी कार से यह अपेक्षित नहीं है कि वह खरीदने के एक महीने के भीतर ही बार-बार वर्कशॉप जाए। गाड़ी का अचानक बंद होना सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है। डीलर की वर्कशॉप ने वारंटी के तहत कई पार्ट्स बदले और कार की मरम्मत की, लेकिन समस्या समाप्त नहीं हुई।
डीलर और कंपनी की प्रतिक्रिया
डीलर ने कहा कि जब भी कार वर्कशॉप में आई, उसकी समस्याओं को वारंटी के तहत ठीक किया गया। उसने डिलीवरी में देरी के लिए सफाई दी और कहा कि कार इंपोर्ट की गई थी, इसलिए देरी उसके नियंत्रण में नहीं थी। वहीं, जैगुआर लैंड रोवर इंडिया ने कहा कि कार एक कंपनी ने खरीदी थी और उसका फेना के साथ सीधे बिक्री का समझौता नहीं था। आयोग ने कहा कि केवल कंपनी के नाम पर कार खरीदी जाने से यह साबित नहीं होता कि कार कारोबारी काम के लिए खरीदी गई थी।
आयोग का निष्कर्ष
आयोग ने कहा कि नई लग्जरी कार से यह उम्मीद की जाती है कि वह बिना किसी परेशानी के चले। खरीदने के कुछ समय बाद बार-बार वर्कशॉप ले जाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। यदि चलती कार अचानक सड़क पर रुक जाए, तो यह लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। नई कार में बार-बार खराबी आने से ग्राहक को मानसिक तनाव भी हुआ। इसके अलावा, आयोग ने डीलर को कार की डिलीवरी में लगभग 9 महीने की देरी के लिए भी जिम्मेदार ठहराया।
