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दिल्ली में BJP विधायक पर SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज, दलित कार्यकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

दिल्ली में भाजपा विधायक गजेंद्र दराल और उनके सहयोगियों के खिलाफ दलित कार्यकर्ता सुनील कुमार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। सुनील का कहना है कि उन्हें पार्टी कार्यालय में बुलाकर मारपीट की गई और जातिसूचक गालियां दी गईं। इस मामले में FIR दर्ज होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, और आम आदमी पार्टी ने विधायक की बर्खास्तगी की मांग की है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
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दिल्ली में विधायक के खिलाफ कार्रवाई

दिल्ली के मुंडका क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक गजेंद्र दराल और उनके सहयोगियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह मामला कंझावाला पुलिस थाने में भाजपा के कंझावाला मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया। सुनील कुमार, जो दलित समुदाय से हैं, ने आरोप लगाया कि विधायक और उनके समर्थकों ने पार्टी कार्यालय में उनके साथ मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं।


मारपीट का आरोप

सुनील कुमार ने बताया कि उन्हें वोटर लिस्ट पर चर्चा के लिए गुरुवार को कार्यालय बुलाया गया था, जहां विधायक और उनके समर्थकों ने उन पर हमला किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कार्यालय के अंदर बंधक बना लिया गया और डंडे, पाइप और बेल्ट से पीटा गया।


सुनील कुमार का बयान

सुनील कुमार ने कहा, 'जब से मैंने डेढ़ साल पहले चुनाव जीतकर यह पद संभाला है, तब से मुझे उनके द्वारा लगातार बुरा बर्ताव सहना पड़ा है। छोटी-छोटी बातों पर अक्सर झगड़े होते थे। उन्होंने मेरे कपड़ों और मालाओं का मजाक उड़ाया और मुझे लीडर नहीं मानने की बात कही।' उन्होंने यह भी कहा कि 10 सितंबर की रात को उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें बंधक बना लिया गया।


राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने विधायक गजेंद्र दराल को बर्खास्त करने की मांग की है। पूर्वी दिल्ली के कोंडली से आप विधायक कुलदीप कुमार ने आरोप लगाया कि दलित समुदाय के एक सदस्य के साथ क्रूरता की गई है।


पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें जानबूझकर चोट पहुंचाना, गलत तरीके से बंधक बनाना, और आपराधिक धमकी शामिल हैं। इसके अलावा, शस्त्र अधिनियम और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लागू की गई हैं।