प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: LPG रिफिल की चुनौतियाँ और स्वास्थ्य पर प्रभाव
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का परिचय
केंद्र सरकार ने 1 मई 2016 को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान करना है, ताकि वे लकड़ी और कोयले के धुएं से बचकर साफ ईंधन का उपयोग कर सकें। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 10 करोड़ 57 लाख से अधिक LPG कनेक्शन गरीब परिवारों की महिलाओं को दिए जा चुके हैं। इसके अलावा, सरकार उज्ज्वला लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम के 9 रिफिल पर प्रति सिलेंडर ₹300 की सब्सिडी भी प्रदान करती है।
रिफिल की कमी के कारण
हालांकि, 2025-26 के दौरान लगभग 2.52 करोड़ परिवारों ने LPG सिलेंडर का एक भी रिफिल नहीं कराया। वहीं, करीब 4.58 करोड़ लोगों ने साल में केवल 1 से 4 रिफिल कराए। भारत में एक सामान्य परिवार को साल में 6 से 12 LPG गैस सिलेंडर की आवश्यकता होती है। यह सवाल उठता है कि कनेक्शन मिलने के बावजूद लाखों परिवार नियमित रूप से गैस सिलेंडर क्यों नहीं भरवा रहे हैं।
लोगों की रिफिल न कराने की मुख्य वजहें
इसका मुख्य कारण रिफिल सिलेंडर की कीमत है। उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मुफ्त है, लेकिन सिलेंडर भरवाने के लिए उपभोक्ताओं को पहले पूरी कीमत चुकानी होती है। सब्सिडी बाद में बैंक खाते में आती है, जिससे कम आय वाले परिवारों के लिए एक बार में इतना खर्च करना कठिन हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार आज भी लकड़ी, उपले और खेतों से निकले अवशेषों का उपयोग करते हैं, क्योंकि ये आसानी से और बिना पैसे के मिल जाते हैं। इसलिए, कई लोग गैस सिलेंडर का उपयोग केवल विशेष अवसरों पर करते हैं।
अन्य कारणों का प्रभाव
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में उज्ज्वला लाभार्थियों ने औसतन 4.8 सिलेंडर रिफिल कराए, जो पहले से बेहतर है, लेकिन फिर भी सामान्य घरेलू आवश्यकता से कम है। यदि लाभार्थी नियमित रूप से गैस सिलेंडर नहीं भरवा पा रहे हैं, तो योजना का मुख्य उद्देश्य अधूरा रह जाता है। इसके अलावा, कुछ परिवारों का मानना है कि लकड़ी के चूल्हे पर बना खाना बेहतर होता है या उन्हें LPG का नियमित उपयोग करने की आदत नहीं है। दूर-दराज के गांवों में LPG एजेंसी तक पहुंचना भी एक चुनौती है।
महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार का उद्देश्य
सरकार का लक्ष्य हर घर में स्वच्छ ईंधन पहुंचाना और पारंपरिक चूल्हों पर निर्भरता को कम करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, घर के अंदर लकड़ी, कोयला और गोबर के उपलों से निकलने वाला धुआं हर साल लाखों लोगों की समय से पहले मौत का कारण बनता है। इससे सांस की बीमारियाँ, फेफड़ों का संक्रमण, दिल की बीमारियाँ और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। यदि उज्ज्वला लाभार्थी नियमित रूप से LPG सिलेंडर नहीं भरवा पा रहे हैं, तो योजना का मुख्य उद्देश्य भी अधूरा रह जाता है।
