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प्रधानमंत्री जन धन योजना: निष्क्रिय खातों की बढ़ती संख्या पर चिंता

प्रधानमंत्री जन धन योजना, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, अब निष्क्रिय खातों की बढ़ती संख्या से जूझ रही है। 2026 तक, 15.32 करोड़ खाते निष्क्रिय हो चुके हैं, जो चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी श्रमिकों की वजह से और वित्तीय साक्षरता की कमी के कारण यह समस्या बढ़ रही है। इस योजना में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है, लेकिन खातों को सक्रिय बनाए रखना एक चुनौती है। जानें इस समस्या के पीछे के कारण और संभावित समाधान।
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प्रधानमंत्री जन धन योजना का परिचय

15 अगस्त 2014 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन धन योजना (PMJDY) की घोषणा की थी, और इसका औपचारिक शुभारंभ 28 अगस्त 2014 को हुआ। यह योजना देश में वित्तीय समावेशन की सबसे बड़ी पहल मानी जाती है, जिसका उद्देश्य हर गरीब और वंचित परिवार को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना है। एक दशक से अधिक समय बीतने के बाद, सरकार ने 58 करोड़ से अधिक खातों और 3 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया है।


निष्क्रिय खातों की बढ़ती संख्या

हाल ही में संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 2026 तक देश में निष्क्रिय जन धन खातों की संख्या 15.32 करोड़ तक पहुंच गई है। इससे पहले, 31 जुलाई 2025 तक 56.03 करोड़ PMJDY खातों में से 13.04 करोड़ खाते, यानी 23%, निष्क्रिय थे। सरकारी बैंकों की बात करें तो, सितंबर 2025 तक निष्क्रियता दर 26% तक पहुंच गई, जो सितंबर 2024 में 21% थी।


RBI के दिशा-निर्देश

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, यदि किसी बचत खाते में लगातार 2 वर्षों तक कोई लेन-देन नहीं होता है, तो उसे निष्क्रिय घोषित किया जाता है। सरकार का कहना है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसी सुविधाएं निष्क्रिय खातों में भी जारी रहती हैं, और बैंक ऐसे खाताधारकों को हर तिमाही सूचनाएं भेजते हैं।


निष्क्रियता की समस्या

संसद में हाल ही में दिए गए उत्तर के अनुसार, 2026 में देशभर में निष्क्रिय जन धन खातों की संख्या 15.32 करोड़ तक पहुंच गई है। 31 जुलाई 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, 56.03 करोड़ कुल खातों में से 13.04 करोड़ खाते निष्क्रिय थे। इसका मतलब है कि हर चार में से एक जन धन खाता निष्क्रिय हो गया है।


योजना की कमजोरियां

यह योजना विशेष रूप से गरीब और वंचित परिवारों के लिए बनाई गई थी, लेकिन निष्क्रिय खातों में सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश की है, जहां लगभग 2.75 करोड़ खाते निष्क्रिय पाए गए। इसके बाद बिहार और मध्य प्रदेश का स्थान है। ये वही राज्य हैं जहां गरीबी और ग्रामीण जनसंख्या की समस्या अधिक है।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी श्रमिक अक्सर काम के लिए दूसरे राज्यों में जाकर नए खाते खोल लेते हैं, जिससे उनके मूल खाते निष्क्रिय हो जाते हैं। इसके अलावा, कम आय वाले परिवारों में पैसों का नियमित आना-जाना न होना और वित्तीय साक्षरता की कमी भी इस समस्या का कारण है।


महिलाओं की भागीदारी

इस योजना में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। 8 जुलाई 2026 तक, देश में 32.72 करोड़ महिला जन धन खाताधारक हैं, जो कुल खातों का 55.7% से अधिक हिस्सा हैं। यह लैंगिक समावेशन के लिए एक सकारात्मक संकेत है।


निष्क्रिय खातों को सक्रिय करने की प्रक्रिया

यदि किसी बचत खाते में लगातार 2 वर्षों तक कोई लेन-देन नहीं होता है, तो उसे निष्क्रिय माना जाता है। खातों को फिर से सक्रिय करने के लिए वीडियो-केवाईसी (V-CIP) और मोबाइल या इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से केवाईसी अपडेट कराना आवश्यक है।


निष्क्रियता की समस्या का समाधान

उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के आंकड़े बताते हैं कि कागज पर बने नियम अभी तक उन गांवों और कस्बों तक नहीं पहुंच पाए हैं, जहां जन धन योजना की सबसे अधिक आवश्यकता थी। 58 करोड़ खाते खोलना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उनमें से हर चौथे खाते का निष्क्रिय होना यह दर्शाता है कि खाता खोलना ही पर्याप्त नहीं है, उसे सक्रिय बनाए रखना भी आवश्यक है।