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फिल्म 'सतलुज' और केपीएस गिल: मानवाधिकारों का उल्लंघन या आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई?

फिल्म 'सतलुज' ने केपीएस गिल के विवादास्पद जीवन को फिर से चर्चा में ला दिया है। क्या वे आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने वाले अधिकारी थे या मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले? जानें उनके जीवन की कहानी, विवाद और जसवंत सिंह खालड़ा के आरोपों के बारे में।
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फिल्म 'सतलुज' का विवाद

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाने के बावजूद, यह फिल्म पंजाब में डाउनलोड लिंक के माध्यम से देखी जा रही है। इस फिल्म ने केपीएस गिल को फिर से चर्चा में ला दिया है। फिल्म में एक पात्र को 1990 के दशक में दिखाया गया है, जब गिल उस समय के प्रमुख अधिकारी थे। उन्हें पंजाब में आतंकवाद को समाप्त करने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है, लेकिन फिल्म में उन्हें मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले और फर्जी एनकाउंटर करने वाले अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया गया है.


केपीएस गिल का विवादास्पद जीवन

केपीएस गिल का जीवन कई विवादों से भरा रहा है। उन्हें असम के हालात सुधारने का श्रेय दिया जाता है, वहीं पंजाब में खालिस्तानियों के नेटवर्क को नष्ट करने के लिए भी जाना जाता है। जसवंत सिंह खालड़ा जैसे एक्टिविस्ट्स ने गिल और उनकी पुलिस पर निर्दोष सिख युवकों की हत्या का आरोप लगाया। खालड़ा भी एक दिन उन युवकों की तरह लाश बन गए।


शुरुआती जीवन

केपीएस गिल का जन्म 29 दिसंबर 1934 को लाहौर में हुआ। उनके पिता, सरदार रछपाल सिंह गिल, सिंचाई विभाग में सिविल इंजीनियर थे। गिल का बचपन काफी डरपोक था, लेकिन उन्होंने बाद में पुलिस में जाने का निर्णय लिया।


पुलिस में करियर की शुरुआत

गिल ने पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद पुलिस की नौकरी ज्वाइन करने का निर्णय लिया। एक घटना ने उन्हें इस दिशा में प्रेरित किया, जब उन्होंने एक बुजुर्ग की मदद की।


असम में पोस्टिंग

गिल ने 1958 में पहले प्रयास में UPSC पास किया और असम-मेघालय कार्डर में शामिल हुए। उन्होंने अपने करियर के पहले 28 साल असम में बिताए।


गिल पर हत्या का आरोप

1961 में गिल को असम के नगांव जिले का SP नियुक्त किया गया। वहां उन्हें अवैध प्रवासियों की समस्या से निपटने का आदेश मिला।


पंजाब में आतंकवाद का बढ़ता खतरा

1980 के दशक में पंजाब में खालिस्तान की मांग तेजी से बढ़ी। गिल को पंजाब आर्म्ड पुलिस का इंस्पेक्टर जनरल बनाया गया।


ऑपरेशन ब्लैक थंडर

गिल ने स्वर्ण मंदिर में घुसे आतंकियों को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन ब्लैक थंडर की योजना बनाई। इस ऑपरेशन ने पंजाब में शांति बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


गिल का बर्खास्त होना

1990 में चंद्रशेखर सरकार ने गिल को बर्खास्त किया। इसके बाद पंजाब में फिर से आतंकवाद बढ़ने लगा।


जसवंत सिंह खालड़ा का खुलासा

जसवंत सिंह खालड़ा ने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस ने हजारों निर्दोष सिख युवकों को मारा। उनके दावों ने गिल की छवि को और भी विवादास्पद बना दिया।


गिल का रिटायरमेंट और बाद का जीवन

गिल ने 1995 में रिटायरमेंट के बाद भी कई देशों में सुरक्षा सलाहकार के रूप में काम किया। उनका निधन 26 मई 2017 को हुआ।