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भारत की प्रजनन दर में गिरावट: क्या है इसके पीछे का कारण?

भारत की प्रजनन दर पहली बार प्रतिस्थापन स्तर से नीचे आ गई है, जो देश के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। दिल्ली में यह दर 1.2 है, जो कि कई विकसित देशों से भी कम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1950 में भारत की जनसंख्या 36 करोड़ थी, जबकि अब यह 1.45 अरब हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो भारत युवाओं का देश से बूढ़ों का देश बन सकता है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और सरकार की योजनाएं क्या हैं।
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भारत की प्रजनन दर में गिरावट: क्या है इसके पीछे का कारण?

भारत की प्रजनन दर में ऐतिहासिक गिरावट

भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) पहली बार प्रतिस्थापन स्तर से नीचे आ गई है, जो कि देश के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। पिछले एक दशक में यह दर 2.3 से घटकर 1.9 पर पहुंच गई है। आमतौर पर प्रतिस्थापन स्तर 2.1 माना जाता है, और यदि यह आंकड़ा इससे कम होता है, तो आने वाली पीढ़ियों की संख्या में कमी का संकेत मिलता है.


दिल्ली की चिंताजनक स्थिति

दिल्ली में प्रजनन दर केवल 1.2 है, जो कि फिनलैंड जैसे विकसित देशों से भी कम है। शिक्षित वर्ग में यह गिरावट पहले ही देखी जा चुकी थी, और अब यह पूरे देश में औसत जन्म दर को प्रभावित कर रही है।


रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

द इकॉनमिस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 1950 में भारत की जनसंख्या 36 करोड़ थी, जबकि आज यह 1.45 अरब हो गई है। पहले एक महिला औसतन 6 बच्चे पैदा करती थी, लेकिन अब यह संख्या घटकर 1.9 रह गई है।


इस रिपोर्ट का डरावना पहलू

जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए प्रजनन दर 2.1 से अधिक होनी चाहिए। दिल्ली में यह दर 1.2 है, जबकि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में यह 1.3 है। पहले माना जाता था कि उत्तर भारत के गरीब राज्य जनसंख्या वृद्धि में देरी करेंगे, लेकिन अब वे भी तेजी से दक्षिण के राज्यों के बराबर आ रहे हैं।


एलन मस्क की चिंता

एलन मस्क, CEO, टेस्ला
भारत की जन्म दर, रिप्लेसमेंट दर से भी नीचे गिर गई है। जो लोग भारत में ज्यादा पढ़े लिखे हैं, उनमें यह आंकड़ा पहले ही बहुत गिर चुका था।


सरकार का बदलता रवैया

सरकार का दृष्टिकोण भी बदल गया है। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'जनसंख्या विस्फोट' की चेतावनी दी थी, लेकिन अब अधिकारी जनसंख्या घटने की चिंता कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तीसरे बच्चे पर 30,000 रुपये देने की योजना की घोषणा की है।


बच्चों की संख्या में कमी के कारण

फैमिली वेलनेस और प्लानिंग कोच, श्रद्धा पांडेय के अनुसार, लड़कियां अब शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और कामकाजी बन रही हैं, जिससे वे कम बच्चे चाहती हैं। परिवारों का मानना है कि एक ही बच्चा होना चाहिए, लेकिन वह भी अच्छा होना चाहिए।


आबादी घटने के अन्य कारण

लोगों का नजरिया बदल रहा है। पहले लोग बेटे की चाह रखते थे, लेकिन अब वे बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं करते। अगर दो बेटियां हैं, तो भी तीसरे बच्चे के बारे में नहीं सोचते।


कम आबादी के संभावित खतरे

अगर यह प्रवृत्ति जारी रही, तो भारत युवाओं का देश से बूढ़ों का देश बन सकता है। बुजुर्गों की संख्या बढ़ेगी और कामकाजी जनसंख्या घटेगी, जिससे लोगों की निर्भरता बढ़ जाएगी।


सरकारों की वर्तमान योजनाएं

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की है। भारत में पिछले 70 वर्षों से बच्चों की संख्या में कमी आ रही है।


सविता देवी की कहानी

दिल्ली में सविता देवी का परिवार गणेश नगर में रहता है। उनकी एक बेटी है, जो सरकारी स्कूल में पढ़ाती है। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के लिए सरकार की सलाह मानी, लेकिन अब अकेलेपन का सामना कर रही हैं।