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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने वोटर लिस्ट में नाम कटने पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने वोटर लिस्ट में नाम कटने के मुद्दे पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक का नाम बिना सुनवाई के नहीं हटाया जा सकता। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। जस्टिस ने संविधान के अनुच्छेदों का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों के बीच भेदभाव नहीं होना चाहिए। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा जस्टिस ने।
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वोटर लिस्ट के संशोधन पर विवाद

वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर शुरू से ही विवाद उठते रहे हैं। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई, लेकिन कोई रोक नहीं लगाई गई। करोड़ों लोगों के नाम हटाए गए, जिसके चलते विपक्षी दलों ने चुनावों को प्रभावित करने के आरोप लगाए। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने एक विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में कहा कि किसी व्यक्ति के मरने के अलावा, बिना सुनवाई के वोटर लिस्ट से उसका नाम नहीं हटाया जा सकता है।


जस्टिस का बयान और प्रदर्शन

रविवार को जस्टिस भुइयां ने इसे मनमाना कार्य बताते हुए नियमों के खिलाफ बताया। उनके इस बयान के बाद चर्चा का एक नया दौर शुरू हो गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली समेत कई स्थानों पर प्रदर्शन हो रहे हैं।


NALSAR यूनिवर्सिटी में जस्टिस का भाषण

जस्टिस उज्जल भुइयां ने हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में वोटिंग अधिकारों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि विदेशी शासन के खिलाफ लंबी लड़ाई के बाद हमें वोटिंग का अधिकार मिला है, जिसे कोई भी संस्था या अदालत नहीं छीन सकती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है।


जस्टिस का स्पष्ट संदेश

NALSAR यूनिवर्सिटी में अपने संबोधन में, जस्टिस भुइयां ने कहा, 'एक नागरिक का वोटर होना और वोट डालना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की नींव है।' उन्होंने बताया कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट, 1950 की धारा 22 के अनुसार, किसी वोटर का नाम हटाने के लिए उसे सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।


संविधान का उल्लंघन

जस्टिस भुइयां ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने को गलत ठहराते हुए कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों के बीच भेदभाव की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि कोई भी प्रक्रिया जो नागरिकों को वोटिंग अधिकार से वंचित करती है, वह संविधान के अनुच्छेद 14 और 326 का उल्लंघन है।


चुनाव आयोग की स्थिति

चुनाव आयोग के कमिश्नरों के बीच SIR को लेकर असहमति की रिपोर्ट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कई विपक्षी दलों के नेता और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता उनका इस्तीफा मांग रहे हैं। चुनाव आयोग ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि असहमति प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन निर्णय आपसी सहमति से लिए गए हैं।