सुरेंद्र कोली की मौत के बाद निठारी कांड पर फिर से उठे सवाल
सुरेंद्र कोली की मौत और निठारी कांड की पुनरावृत्ति
सुरेंद्र कोली, जो निठारी कांड से जुड़े मामलों में दोषमुक्त हुए थे, की हाल ही में हरिद्वार में मृत्यु हो गई। उनकी मौत ने एक बार फिर से इस विवादास्पद मामले को चर्चा में ला दिया है। लगभग 20 वर्षों तक, कोली को भारत के सबसे कुख्यात सीरियल किलरों में से एक माना गया। उन्हें 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 12 मामलों में उन्हें बरी कर दिया। इसके बाद, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें निर्दोष ठहराया। अब उनकी मृत्यु के बाद, नारायण सिंह नामक एक व्यक्ति ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं।
कोली की जिंदगी और निठारी कांड की शुरुआत
2005 में नोएडा के निठारी क्षेत्र में महिलाओं और बच्चों के लापता होने की घटनाएं सामने आईं। दिसंबर 2006 में, D-5 और D-6 के पीछे से मानव खोपड़ियां और हड्डियां मिलीं। इसके बाद, 29 दिसंबर को सुरेंद्र कोली को एक गुमशुदगी की FIR के सिलसिले में हिरासत में लिया गया। उसी दिन उनके मकान मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को भी गिरफ्तार किया गया।
जांच CBI को सौंप दी गई और निठारी से जुड़े कई मामलों में आपराधिक मुकदमे चले। सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराया गया, लेकिन बाद में सभी मामलों से बरी कर दिया गया। निठारी मामलों में कोली के खिलाफ मुख्य आधारों में कथित कबूलनामा और अन्य सबूत शामिल थे। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने रिंपा हलदर मामले में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा।
जेल में सुरेंद्र कोली का अनुभव
नारायण सिंह ने बताया कि उन्होंने जेल में कोली से मुलाकात की थी और उसकी मां को उससे मिलवाने में मदद की थी। उन्होंने यह भी कहा कि कोली ने उन्हें हिरासत में प्रताड़ना की बातें बताईं। नारायण ने कहा, 'उसे पेट्रोल से जलाया गया और उसके नाखून खींचे गए।'
नारायण ने यह भी कहा कि कोली पर कई आरोप लगाए गए और उसे 'नरपिशाच' जैसे नाम दिए गए। ये बातें आज भी लोगों के मन में ताजा हैं। इसके अलावा, नारायण ने कोली पर बनी फिल्म पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वह जेल में था, तो उसकी फिल्म कैसे बनाई गई?
गांव के लोगों की नजर में सुरेंद्र कोली
गांव के लोग सुरेंद्र कोली को दो अलग-अलग नजरियों से देखते हैं। एक ओर, वह एक बच्चा था जो उनके साथ खेलता था, और दूसरी ओर, वह एक आरोपी है जिसके नाम से एक भयावह कहानी जुड़ी हुई है। हालांकि, गांव की यादें किसी आपराधिक मामले में निर्दोष या दोषी होने का प्रमाण नहीं हैं।
नारायण सिंह ने मीडिया कवरेज पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि कोली को दोषी के रूप में पेश किया गया था, जबकि आरोप साबित नहीं हुए थे।
सुरेंद्र कोली का नाम और उसकी मौत
नारायण सिंह का कहना है कि सुरेंद्र कोली का असली नाम सदराम था, लेकिन उसने अपने नाम के साथ 'कोली' जोड़ लिया। 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में सुरेंद्र कोली का शव मिला। पुलिस अधिकारी शिशुपाल सिंह के अनुसार, प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है।
कोली की मृत्यु के साथ उसकी कानूनी कहानी समाप्त हो गई है, लेकिन निठारी कांड से जुड़े कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए यह सवाल अब भी महत्वपूर्ण है कि इतने वर्षों बाद भी निठारी के अपराधों का पूरा सच क्यों सामने नहीं आया।
