UPI लेन-देन पर नए बिल का असर: क्या बढ़ेंगे चार्ज?
UPI का बढ़ता उपयोग और नया बिल
देश में करोड़ों लोग रोजाना किराना सामान से लेकर फल-सब्जी तक की खरीदारी के लिए यूपीआई (UPI) का सहारा लेते हैं। हाल ही में सरकार द्वारा पेश किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल-2026 ने इस पर बहस को जन्म दिया है। इस बिल में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट-2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है, जिससे कुछ विशेष प्रकार के UPI लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का कानूनी आधार तैयार किया जा रहा है।
विपक्ष की चिंताएं और सरकार का स्पष्टीकरण
विपक्ष का मानना है कि इससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या भविष्य में UPI से भुगतान करने पर ग्राहकों को भी शुल्क देना होगा। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम ग्राहकों से यूपीआई पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। ग्राहक पहले की तरह क्यूआर कोड स्कैन करके मुफ्त में पैसे का ट्रांसफर और खरीदारी कर सकेंगे।
UPI के आंकड़े और सरकार की इंसेंटिव स्कीम
UPI अब देश की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट प्रणाली बन चुकी है, जिसमें करोड़ों लोग निर्भर हैं। जुलाई में कुल 23.66 अरब UPI ट्रांजेक्शन हुए, जो अब तक का सबसे अधिक मासिक आंकड़ा है। इन लेन-देन की कुल कीमत ₹29.88 लाख करोड़ रही। रोजाना औसतन 76.3 करोड़ ट्रांजेक्शन होते हैं। यह पूरी तरह से मुफ्त है, लेकिन यह सरकार की इंसेंटिव स्कीम पर निर्भर है।
MDR का अर्थ और इसके प्रभाव
MDR, यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट, वह शुल्क है जो दुकानदार डिजिटल पेमेंट के लिए बैंक और पेमेंट कंपनियों को देता है। वर्तमान में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर यह शुल्क 0% है। प्रस्तावित बदलाव के तहत, 2,000 से अधिक के UPI ट्रांजेक्शन पर 0.3% से 0.5% तक का MDR लगाया जा सकता है, लेकिन यह केवल बड़े मर्चेंट्स पर लागू होगा।
सरकार का उद्देश्य और डिजिटल पेमेंट्स का खर्च
भारत सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इस कानून में धारा 10A जोड़ी थी, जिससे UPI और रूपे कार्ड लेन-देन पर MDR लगाने पर रोक लगाई गई थी। संशोधन के बाद, सरकार और NPCI को बड़े लेन-देन पर सीमित शुल्क तय करने का अधिकार मिलेगा।
भविष्य की दिशा
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई निर्णय लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम के संचालन का खर्च किसी न किसी को उठाना होगा। सरकार और आरबीआई ने यह स्पष्ट किया है कि आम ग्राहकों से यूपीआई पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
UPI पर चार्ज नहीं, फिर खर्च कौन उठाएगा?
भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट्स नेटवर्क का खर्च कौन उठाएगा, इस पर विवाद है। बैंक और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारी लागत आती है। सरकार चाहती है कि आम यूजर्स पर बोझ डाले बिना बैंकों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाया जाए।
क्या MDR लागू होगा?
लोगों का मानना है कि अगर MDR लागू हुआ, तो यह मर्चेंट के जरिए ग्राहकों तक पहुंच सकता है। हालांकि, सरकार और आरबीआई ने फिर से स्पष्ट किया है कि आम ग्राहकों से यूपीआई पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
UPI का भविष्य

