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अंकिता भंडारी हत्याकांड: योगिता भयाना की न्याय की लड़ाई

अंकिता भंडारी हत्याकांड में सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने अभिभावकों के साथ मिलकर न्याय की मांग की है। इस मामले में दुष्यंत गौतम के संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जानें इस केस में अब तक क्या हुआ है और योगिता का संघर्ष कैसे जारी है।
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अंकिता भंडारी हत्याकांड में योगिता भयाना की भूमिका

उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड में उनकी माता सोनी देवी और पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी के साथ सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने इंडिया गेट से राजघाट तक लगातार समर्थन दिया है। वह पुलिस के साथ संघर्ष कर रही हैं और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दबाव बना रही हैं। कई बार पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन के दौरान हटाया है। उनका सवाल है कि यदि दुष्यंत कुमार गौतम इस मामले में संदिग्ध हैं, तो उन्हें केंद्र सरकार द्वारा संवैधानिक संरक्षण क्यों दिया गया।


बुधवार को जब वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी राजघाट पर धरने पर बैठे थे, योगिता भयाना भी वहां मौजूद थीं। उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल इस मामले पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि योगिता भयाना बलात्कार पीड़ित महिलाओं के लिए कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ रही हैं।


योगिता भयाना: एक सामाजिक कार्यकर्ता

योगिता भयाना PARI फाउंडेशन की संस्थापक हैं और महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों के लिए काम करती हैं। वह 2007 से मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हैं और निर्भया कांड के बाद जुवेनाइल जस्टिस कानूनों में बदलाव की मांग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


उनके अनुसार, निर्भया केस के दौरान उनके पास कई अन्य बलात्कार और बर्बरता के मामले थे। उन्होंने कहा कि न्याय की गारंटी नहीं दी जा सकती, लेकिन पीड़ितों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया जा सकता है।


अंकिता भंडारी केस में घटनाक्रम

अंकिता भंडारी के अभिभावक दिल्ली में धरना दे रहे हैं और दुष्यत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नहीं होना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।


इस मामले में तीन आरोपी हैं: पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता। उन्हें 23 और 24 सितंबर 2022 को गिरफ्तार किया गया। पुलकित आर्य, जो एक पूर्व BJP नेता का बेटा है, पर आरोप है कि उसने अंकिता को नहर में धकेल दिया।


सजा और धरना

18 मार्च 2023 को कोटद्वार की सत्र अदालत ने आरोप तय किए। पुलकित आर्य को हत्या, सबूत मिटाने और छेड़छाड़ के आरोपों का सामना करना पड़ा। 19 मई 2025 को सुनवाई पूरी हुई और 29-30 मई को तीनों को दोषी ठहराया गया।


अंकिता के परिवार का कहना है कि जिस 'VIP' के लिए अंकिता पर दबाव बनाया गया, वह दुष्यंत गौतम हो सकते हैं। इस मामले में स्थानीय लोगों में गुस्सा फैल गया और प्रशासन ने रिजॉर्ट के कुछ हिस्से गिरा दिए।


योगिता भयाना की लड़ाई

योगिता भयाना और अंकिता के परिवार की मांग है कि दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल के पद से हटाया जाए। कांग्रेस का आरोप है कि यह नियुक्ति दुष्यंत गौतम को बचाने के लिए की गई है।


हालांकि मुख्य आरोपी को उम्रकैद की सजा मिल गई है, लेकिन योगिता भयाना और अंकिता के परिजन कथित VIP एंगल की जांच को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं।