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अकाल तख्त का योग पर बड़ा बयान: गुरुद्वारों में योग सत्र की अनुमति नहीं

अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने हाल ही में एक बयान में कहा है कि सिख धर्म में योग का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों से अपील की है कि वे गुरुद्वारा परिसर में योग सत्र आयोजित न करें। उनका मानना है कि गुरुद्वारे का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना है, न कि शारीरिक गतिविधियों का स्थान बनाना। जानें, उन्होंने योग के बारे में और क्या कहा और सिख धार्मिक परंपराओं के संदर्भ में उनकी चिंताएं क्या हैं।
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अकाल तख्त का योग पर बयान


अकाल तख्त का बड़ा बयान: योग का प्रचलन विश्वभर में बढ़ता जा रहा है, और कई गुरुद्वारों में योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। हाल ही में, अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने स्पष्ट किया कि सिख धर्म में योग का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों से अनुरोध किया है कि वे गुरुद्वारा परिसर में योग जैसी गतिविधियों की अनुमति न दें। उनका कहना है कि गुरुद्वारे ऐसे स्थान हैं जहां श्रद्धालु गुरबानी, शबद और सिख धार्मिक परंपराओं से जुड़ते हैं, इसलिए वहां का माहौल धार्मिक मर्यादा के अनुरूप होना चाहिए। यह बयान उन्होंने अमृतसर स्थित मंजी साहिब दीवान हॉल में सुबह की सभा में दिया।


योग पर जत्थेदार का दृष्टिकोण

ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि योग का मूल अर्थ आध्यात्मिक जुड़ाव से है, लेकिन आजकल इसे मुख्य रूप से शारीरिक व्यायाम के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने घर या अन्य स्थान पर व्यायाम करना चाहता है, तो इसमें कोई समस्या नहीं है, लेकिन गुरुद्वारे का उद्देश्य भिन्न है। उन्होंने बताया कि सिख गुरुओं ने गुरुद्वारों को ऐसे स्थानों के रूप में स्थापित किया है जहां श्रद्धालु गुरु की वाणी और आध्यात्मिक संदेश से जुड़ सकें। इसलिए, गुरुद्वारे में होने वाली गतिविधियां सिख धार्मिक सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।


गुरबानी और शबद को प्राथमिकता

जत्थेदार ने कहा कि सिखों के जीवन में गुरबानी का विशेष महत्व है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे गुरुद्वारों में अपने ध्यान को धार्मिक शिक्षाओं, कीर्तन और शबद से जोड़ें। उन्होंने बताया कि गुरुद्वारा केवल शारीरिक गतिविधियों का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक अनुभव और गुरु की शिक्षाओं को समझने का केंद्र है। उनके अनुसार, परिसर में ऐसी गतिविधियों की अनुमति नहीं होनी चाहिए जो धार्मिक उद्देश्य से भटकाव पैदा करें। कुछ सिख युवाओं ने उनसे संपर्क कर यह चिंता जताई थी कि कुछ गुरुद्वारों में योग कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं।


मनमत से जोड़ा मामला

कुलदीप सिंह गड़गज ने गुरुद्वारों में योग अभ्यास को सिख परंपराओं के खिलाफ बताते हुए इसे 'मनमत' की श्रेणी में रखा। सिख धर्म में 'मनमत' का अर्थ है ऐसे आचरण जो गुरु की शिक्षाओं और निर्धारित धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप न हो। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधकों से कहा कि वे इस तरह की गतिविधियों के प्रति सतर्क रहें और गुरुद्वारा परिसर की धार्मिक पहचान बनाए रखें। अपने संबोधन में जत्थेदार ने इस बात पर जोर दिया कि गुरुद्वारों का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना है। उन्होंने कहा कि गुरबानी के माध्यम से व्यक्ति को आत्मिक शांति और जीवन जीने की दिशा मिलती है। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों से अपील की कि वे परिसर में होने वाली गतिविधियों का चयन करते समय सिख धार्मिक परंपराओं और मर्यादा को प्राथमिकता दें।