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अखिलेश यादव का मोदी सरकार पर तीखा हमला, छात्रों के प्रति बर्बरता की निंदा

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संसद के मॉनसून सत्र के दौरान मोदी सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर इस्तीफे का दबाव न बनाने का आरोप लगाया और छात्रों के साथ हुई बर्बरता की निंदा की। यादव ने कहा कि बीजेपी ने हिटलर जैसा गैंग बनाया है और उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वे खुद सम्मान के साथ अपनी कुर्सी छोड़ दें। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया।
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संसद में शिक्षा मंत्री पर हमला

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष, अखिलेश यादव ने संसद के मॉनसून सत्र के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी और केंद्र सरकार धर्मेंद्र प्रधान पर इस्तीफे का दबाव नहीं बना पा रही है, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर उन्होंने इस्तीफा दिया, तो कई राज खुल सकते हैं। यही कारण है कि बीजेपी अपने सहयोगियों पर कोई दबाव नहीं बना रही है।


छात्रों के साथ बर्बरता की निंदा

अखिलेश यादव ने कहा, 'कल दो युवाओं और छात्रों के साथ जो हुआ, उसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। आजादी के बाद किसी सरकार ने इस तरह का व्यवहार नहीं किया।' उन्होंने बताया कि छात्रों को चोटें आई हैं, उनके सिर पर टांके आए हैं, और कई की हड्डियाँ टूटी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बच्चे दूर से आए थे और उनके साथ बुरा व्यवहार किया गया। छात्रों पर आंसू गैस के गोले भी चलाए गए।


बीजेपी पर हिटलर जैसा गैंग बनाने का आरोप

अखिलेश यादव ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो सामने आए हैं, वे हिटलर के समय के राजनीतिक गैंग की याद दिलाते हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसा लग रहा था कि प्राइवेट लोग सादे कपड़ों में लोगों पर हमला कर रहे थे। यह लोकतंत्र में कभी भी स्वीकार्य नहीं हो सकता। हम उस दिन भी विरोध कर रहे थे और आज भी कर रहे हैं।'


बीजेपी को सम्मान के साथ कुर्सी छोड़ने की सलाह

अखिलेश यादव ने कहा कि इस तरह की दमनकारी सरकार को हटाने के लिए हम लगातार विरोध करते रहेंगे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलनकारियों को हटाने के बजाय, उन्हें खुद सम्मान के साथ अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए।


पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

गौरतलब है कि सोमवार को मॉनसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को, कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर संसद तक शांति मार्च निकाला गया था। लेकिन पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकते हुए लाठीचार्ज कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप कई छात्रों को चोटें आईं।