अखिलेश यादव ने यूपी सरकार पर स्वास्थ्य संकट को लेकर साधा निशाना
अखिलेश यादव का स्वास्थ्य विभाग पर हमला
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य विभाग की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जीवित लोगों का ध्यान रखने वाला कोई नहीं है, तो मृतकों के लिए क्या उम्मीद की जा सकती है?
उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जो लोग बरेली में रैली करने आ रहे हैं, उन्हें शाहजहांपुर भी जाना चाहिए, जहां वे पहले शिलान्यास करने गए थे, और देखना चाहिए कि भाजपा शासन में पूरा उत्तर प्रदेश किस तरह की 'मेडिकल अराजकता' का सामना कर रहा है। अखिलेश ने यह भी पूछा कि क्या यूपी का स्वास्थ्य मंत्रालय 'Sick Leave' पर है?
हाल ही में बांदा जिले के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के ओटी ब्लॉक से एक मृत नवजात को आवारा कुत्तों ने ले जाकर नोंच डाला। नवजात के हाथ और पैर करीब 50 मीटर दूर मिले। परिजन नवजात के शव के पास सो रहे थे। सीसीटीवी फुटेज में कुत्तों को नवजात को ले जाते हुए देखा गया। अस्पताल प्रशासन ने इसे सुरक्षा में चूक मानते हुए तीन गाड़ियों की सेवा समाप्त करने का पत्र लिखा है और विभागाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है।
भाजपा राज में जब जीवित का ही ख़्याल रखनेवाला कोई नहीं है, तो मृत के लिए क्या अपेक्षा करना।
जो लोग बरेली में रैली करने आ रहे हैं वो बगल के उस शाहजहांपुर भी चलें जाएं जहाँ कभी वो शिलान्यास करने गए थे और देखें कि भाजपा राज में किस तरह पूरा उप्र ‘मेडिकल अराजकता’ के दौर से गुज़र रहा है।
उप्र का स्वास्थ्य मंत्रालय ‘Sick Leave’ पर है क्या?
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) November 3, 2026
गिरवां के बड़ोखर खुर्द निवासी गनेश ने बताया कि रविवार रात लगभग 11:30 बजे उनकी पत्नी गुड़िया को प्रसव पीड़ा हुई, जिसके बाद वे 102 एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज पहुंचे। एंबुलेंस में ही बच्चे का जन्म हुआ। गुड़िया को स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भर्ती कराया गया। ड्यूटी पर तैनात डॉ. सुशील ने रात करीब 12:30 बजे उन्हें मृत नवजात सौंपा। उन्होंने शिशु का शव भाभी ऊषा को दे दिया। रात होने के कारण ओटी ब्लॉक के हॉल में बैंच पर गनेश और फर्श पर ऊषा नवजात के शव को लेकर लेट गए। दोनों को नींद आ गई। इस बीच परिसर में घूम रहे कुत्ते नवजात का शव उठा ले गए। करीब तीन बजे गनेश की नींद खुलने पर उन्हें शव गायब मिला। उन्होंने ऊषा को जगाया और उसकी तलाश की। हॉल से करीब 50 मीटर दूर कॉरिडोर में नवजात के दोनों हाथ और दोनों पैर पड़े थे। सिर और धड़ का कुछ पता नहीं चला। घटना से मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया। गनेश ने सुबह करीब सात बजे शव के अवशेष केन नदी में प्रवाहित कर दिए। मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस ने परिजन के बयान दर्ज किए। प्राचार्य ने स्त्री एवं प्रसूति रोग की विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी से स्पष्टीकरण मांगा है। बांदा शहर कोतवाल बलराम सिंह ने बताया कि परिजन ने अभी तक कोई तहरीर नहीं दी है, जांच की जा रही है।
