अग्निवीरों के लिए नई सेवा शर्तें: क्या है भविष्य?
अग्निवीरों की सेवा में बदलाव
हाल ही में की गई घोषणा से अग्निवीरों के करियर को लेकर अनिश्चितता का भाव समाप्त नहीं होगा। हालांकि, उन्हें सेना में दो साल और बने रहने का अवसर दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी सेवा की शर्तें क्या होंगी।
अग्निवीरों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है कि उनकी नौकरी भारतीय सेना में कम से कम दो साल तक जारी रह सकती है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से, इस तरह का अस्थायी सेवा विस्तार उचित नहीं माना जा सकता। मुख्य चिंता यह है कि क्या इससे अग्निवीरों के मन में अपने करियर को लेकर अनिश्चितता समाप्त होगी। कहा गया है कि कार्य रिकॉर्ड के आधार पर दो साल बाद उन्हें सेवा में बनाए रखने की संभावना है, लेकिन उनकी सेवा शर्तें क्या होंगी, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
क्या उन्हें स्थायी नौकरी के समान वेतन, छुट्टियाँ, पेंशन, और शहादत की स्थिति में अनुग्रह सुविधाएँ मिलेंगी? अग्निपथ योजना के साथ जुड़े मुद्दे यही हैं। इस योजना के तहत सेना में स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार की नौकरियों का प्रावधान किया गया है, जिस पर कई सवाल उठते रहे हैं।
इस योजना पर आरोप लगाया गया है कि यह रिटायर्ड सैनिकों के लिए राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से लागू की गई वन रैंक, वन पेंशन फॉर्मूले का परिणाम है। इस फॉर्मूले के कारण रक्षा बजट पर भारी दबाव पड़ा, और सरकार ने ऐसे सैनिकों की भर्ती का प्रावधान किया, जिन्हें पेंशन नहीं देनी पड़े। यह एक दुर्लभ उदाहरण है, जिसमें अतीत के लिए वर्तमान सुरक्षा आवश्यकताओं की अनदेखी की गई।
यह सोचना कठिन है कि जिस देश को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर लगातार तनाव का सामना करना पड़ रहा हो, वहां सुरक्षा के प्रति ऐसा अस्थायी दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। वर्तमान योजना के तहत, एक चौथाई अग्निवीरों को सेना में स्थायी रूप से शामिल किया जाएगा, जबकि तीन चौथाई को अस्थायी सेवा विस्तार मिलेगा। चार साल में हुए इस बदलाव से यह स्पष्ट होता है कि अग्निपथ योजना का ढांचा कितनी अस्थायी रूप से तैयार किया गया है और अभी भी इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। स्थायी समाधान यही होगा कि इस योजना को समाप्त कर सेना में भर्ती का पुराना तरीका पुनः लागू किया जाए।
