अजीत डोभाल का बयान: भारत की सुरक्षा नीति और ऑपरेशन सिंदूर की कहानी
नई दिल्ली में अजीत डोभाल का महत्वपूर्ण बयान
नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने हाल ही में भारत की सुरक्षा नीति और वैश्विक दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है। डिस्कवरी चैनल की नई डॉक्यूमेंट्री 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' के लिए दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भारत की सहिष्णुता को कमजोरी समझने की गलती किसी को नहीं करनी चाहिए। यह उनका पहला औपचारिक साक्षात्कार है जो सैन्य अभियान के समापन के बाद आया है।
डॉक्यूमेंट्री में सैन्य रणनीति का खुलासा
इस डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण डिस्कवरी चैनल और डिस्कवरी प्लस पर शनिवार रात 9 बजे होगा, जिसमें भारत के प्रमुख सैन्य अधिकारियों के अनुभवों को साझा किया जाएगा, जिन्होंने इस मिशन की योजना बनाई और उसे लागू किया।
इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों को भी दर्शाया जाएगा।
88 घंटे का संघर्ष: सुरक्षा की नई परिभाषा
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' की शुरुआत की। इस दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कई आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए।
भारत ने सीमा पार से हुई हरकतों का जवाब आक्रामकता से दिया, और यह संघर्ष 88 घंटे तक चला, जो अंततः 10 मई को दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समझौते के साथ समाप्त हुआ।
दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करना था मुख्य लक्ष्य
अजीत डोभाल ने इस साक्षात्कार में इस अभूतपूर्व सैन्य अभियान की पृष्ठभूमि और रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य उन ठिकानों को नष्ट करना था, जिन्होंने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की योजना बनाई थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक समुदाय को यह समझना चाहिए कि भारत किसी भी स्थिति में बड़े जोखिम उठाने से नहीं हिचकेगा और सीमाओं के पार प्रभावी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा।
