अदाणी ग्रुप का नवीकरणीय ऊर्जा में बड़ा लक्ष्य: 2030 तक 50 गीगावाट क्षमता
अदाणी ग्रुप की ऊर्जा योजनाएं
लंदन/नई दिल्ली: अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने बताया कि अदाणी ग्रुप विश्व के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो का निर्माण कर रहा है। समूह ने 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान, अदाणी ग्रीन एनर्जी और एनर्जी ट्रांजिशन्स कमीशन के सहयोग से आयोजित पहले अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग में उन्होंने कहा कि हम पंप्ड हाइड्रो और बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही, देशभर में कुशल बिजली वितरण के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं और हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित कर रहे हैं।
सागर अदाणी ने कहा, “हम इस कार्य को ऐसे पैमाने और गति से कर रहे हैं, जैसा कि दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा। छोटे बदलाव अब पर्याप्त नहीं हैं।” उन्होंने पिछले तीन महीनों की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे सभी देशों को सोचने पर मजबूर होना पड़ा है।
उन्होंने बताया कि विकसित और विकासशील देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ते भू-राजनीतिक संकटों से सुरक्षित रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। विकासशील देशों में करोड़ों लोग मध्यम वर्ग में शामिल हो रहे हैं, जिससे ऊर्जा की मांग बढ़ रही है। सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना अब एक बुनियादी आवश्यकता बन गई है।
सागर अदाणी ने कहा कि वैश्विक तनावों ने ऊर्जा की आवश्यकता को अस्तित्व की लड़ाई बना दिया है। उन्होंने कहा, “ऊर्जा सुरक्षा, किफायती ऊर्जा की उपलब्धता और टिकाऊ ऊर्जा आज की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं।”
उन्होंने भारत में विद्युतीकरण की आवश्यकता को सबसे अधिक और चुनौतीपूर्ण बताया। 2024 में भारत ने सभी स्रोतों से लगभग 10,000 टेरावाट-घंटे ऊर्जा की खपत की।
सागर अदाणी ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत को लगभग 2,000 गीगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने की आवश्यकता है, जो सस्ती, सभी के लिए उपलब्ध और स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित होनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि भारत को हर क्षेत्र में तेजी से विद्युतीकरण करना होगा ताकि आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम हो सके। इसके लिए व्यावहारिक सोच अपनानी होगी और सभी उपलब्ध ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना होगा।
सागर अदाणी ने कहा, “मजबूत और बड़े पैमाने पर उपलब्ध बेसलोड बिजली के बिना यह लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है।”
उन्होंने पिछले एक दशक में भारत सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की, जिसमें अनावश्यक नियमों को कम करना और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों में स्पष्टता और निरंतरता ने भारत की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत और लचीला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
