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अनंत चतुर्दशी: ज्योतिषीय महत्व और लाभ

अनंत चतुर्दशी, जो इस वर्ष 25 सितंबर को मनाई जाएगी, धन और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। जानें इस दिन की पूजा विधि, 14 गांठों का महत्व और अनंत सूत्र धारण करने के नियम। यह जानकारी आपको इस विशेष दिन के महत्व को समझने में मदद करेगी।
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अनंत चतुर्दशी का महत्व

अनंत चतुर्दशी ज्योतिषीय लाभ: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि इस वर्ष 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन को अनंत चतुर्दशी के रूप में जाना जाता है, जो धन, ऐश्वर्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा विधिपूर्वक की जाती है। पूजा के बाद, कुमकुम से रंगे सूती या रेशमी धागे में 14 गांठें लगाकर उसे अभिमंत्रित कर धारण किया जाता है।


14 गांठों का ज्योतिषीय महत्व

अनंत सूत्र केवल एक धागा नहीं है, बल्कि यह नवग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने वाला एक सुरक्षा कवच है। 14 की संख्या और गांठों का संबंध ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं से जुड़ा हुआ है।


अनंत चतुर्दशी: 14 गांठों का ज्योतिषीय आधार

वैदिक ज्योतिष में 14 की संख्या का अंक ज्योतिषीय योग 5 (1 + 4 = 5) बनता है, जिसका स्वामी बुध ग्रह है। बुध बुद्धि, व्यापार और वाणी का कारक ग्रह माना जाता है। भगवान विष्णु स्वयं बुध और देवगुरु बृहस्पति के अधिष्ठाता देव हैं। इसलिए, यह धागा व्यक्ति की बुद्धि को स्थिर करता है और व्यापारिक घाटे को समाप्त करने में मदद करता है।


नवग्रह पीड़ा से मुक्ति का विधान

कुंडली में कालसर्प दोष या शनि की साढ़ेसाती झेल रहे जातकों के लिए यह सूत्र एक प्रभावी उपाय है। महाभारत काल में, जब पांडव विपदाओं में थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत सूत्र धारण कराया था।


अनंत सूत्र धारण करने के नियम

ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, पुरुषों को यह 14 गांठों वाला पवित्र सूत्र अपनी दाहिनी भुजा पर बांधना चाहिए, जबकि महिलाओं के लिए इसे बाईं भुजा पर धारण करने का नियम है। शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु के समक्ष 'ॐ अनंताय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करके इस धागे को पहनना चाहिए।