अनंतनाग आतंकी हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू
सुरक्षा एजेंसियों की समीक्षा प्रक्रिया
श्रीनगर: श्रीअमरनाथ यात्रा के दौरान दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षा प्रबंधों की गहन समीक्षा आरंभ कर दी है। एजेंसियों का मानना है कि बढ़ते दबाव के चलते आतंकवादी अब सीधे मुठभेड़ से बचते हुए शहरी क्षेत्रों में टारगेट किलिंग की घटनाओं को अंजाम देकर दहशत फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
आतंकियों का उद्देश्य
खुफिया जानकारी के अनुसार, आतंकवादी यात्रा के दौरान हमले कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य कश्मीर में सामान्य होते हालात को प्रभावित करना और क्षेत्र की नकारात्मक छवि को पुनः प्रस्तुत करना है। इसके लिए सीमा पार से संचालित आतंकियों के हैंडलर कश्मीर में सक्रिय अपने मॉड्यूल और ओवरग्राउंड वर्करों (OGWs) को लगातार निर्देश दे रहे हैं।
हमले की समय सीमा
सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ निरंतर अभियान चलाने का निर्णय लिया है। कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ अजय बाचलू का कहना है कि अनंतनाग में हुआ हमला उस समय हुआ जब अमरनाथ यात्रा भारी बारिश के कारण स्थगित थी। हमले की समय सीमा यह दर्शाती है कि आतंकियों का उद्देश्य बड़ी जनहानि करना नहीं, बल्कि भय का माहौल बनाकर अपनी उपस्थिति का संदेश देना था।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आतंकियों का लक्ष्य बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाना होता, तो वे यात्रा के काफिले या शिविर को निशाना बना सकते थे। हालांकि, ऑपरेशन 'सिंदूर' जैसी कड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन बड़े हमलों के संभावित परिणामों को लेकर सतर्क हैं।
हमले की रणनीति
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिस स्थान पर हमला हुआ, वह एक व्यस्त बाजार है, जहां नियमित रूप से पुलिस बल तैनात रहता है। ऐसे क्षेत्रों में हमला कर भागना आतंकियों की पुरानी रणनीति रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना को अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में सेंध नहीं माना जा सकता, क्योंकि हमला यात्रा से जुड़े किसी काफिले या शिविर पर नहीं, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को निशाना बनाकर किया गया।
सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा
अधिकारी के अनुसार, हमले के तरीके से यह प्रतीत होता है कि आतंकियों ने पहले इलाके की रेकी की थी और यह दो से तीन आतंकियों के छोटे मॉड्यूल की सुनियोजित कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने इस घटना को 'लोन वुल्फ' रणनीति मानने से भी इनकार किया और कहा कि अचानक हमला कर भागना कश्मीर में आतंकियों की पुरानी कार्यशैली रही है।
भविष्य की सुरक्षा रणनीतियाँ
हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां सभी स्तरों पर सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा कर रही हैं, ताकि संभावित कमियों को दूर किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस घटना को आतंकवाद की वापसी के रूप में नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।
