अनुसूचित जातियों और जनजातियों के खिलाफ भेदभाव: कानून और आंकड़े
भारत में भेदभाव के खिलाफ कानून
भारत में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के खिलाफ भेदभाव को रोकने के लिए एक विशेष कानून लागू है। यह कानून, जिसे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 कहा जाता है, अपने गैर-जमानती प्रावधानों के कारण अक्सर चर्चा में रहता है। यह कानून दलित समुदायों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा को रोकने के लिए बनाया गया है, जिसके तहत बिना प्रारंभिक जांच के गिरफ्तारी की जा सकती है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि केवल एक तिहाई मामलों में ही सजा मिल पाती है, जबकि अन्य मामलों में आरोपी विभिन्न कारणों से बरी हो जाते हैं।
आंकड़ों की स्थिति
SC-ST अधिनियम 1989 के तहत दर्ज मामलों के संबंध में राज्यसभा सांसद चंद्रकांत हंडोरे ने सवाल उठाए थे। उन्होंने पिछले तीन वर्षों में दर्ज मामलों की संख्या, लंबित मामलों, देरी के कारणों और दोष सिद्धि की दर के बारे में जानकारी मांगी थी। इस पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के राज्यमंत्री रामदास आठवले ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए जानकारी दी। आंकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 55 से 57 हजार मामले अनुसूचित जातियों के खिलाफ और 10 से 12 हजार मामले अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ दर्ज होते हैं।
मुकदमों की लंबित स्थिति
देश की अदालतों में लंबित मामलों की स्थिति SC-ST अधिनियम के तहत भी समान है। 2022 में SC के खिलाफ 19057 मामले लंबित थे, जो 2023 में 16419 और 2024 में 17123 हो गए। इसी तरह, ST के खिलाफ 3350 मामले 2022 में लंबित थे, जो 2023 में बढ़कर 6961 और 2024 में 7219 हो गए। यह दर्शाता है कि लगभग एक तिहाई मामले लंबित रह जाते हैं।
दोष सिद्धि की दर
दोष सिद्धि के आंकड़े भी चिंताजनक हैं। SC के खिलाफ अपराधों में दोष सिद्धि की दर 2022 में 34.1 प्रतिशत, 2023 में 32.4 प्रतिशत और 2024 में 33.9 प्रतिशत रही। यह दर्शाता है कि दर्ज मामलों में से केवल एक तिहाई में ही दोष साबित होता है। ST के खिलाफ अपराधों में यह दर और भी कम है, 2022 में 28.1 प्रतिशत, 2023 में 24.6 प्रतिशत और 2024 में 33.2 प्रतिशत रही।
पीड़ितों को मुआवजा
SC-ST अधिनियम के तहत पीड़ितों को केंद्र सरकार द्वारा मुआवजा भी दिया जाता है। 2023-24 में 88,172 पीड़ितों को 39.27 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया। इसी तरह, 2023-24 में 79,667 पीड़ितों को 53.53 करोड़ रुपये और 2024-25 में 99,965 पीड़ितों को 49.52 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया।
