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अभिजीत दिपके का बिहार दौरा: छात्रों के आंदोलन पर उठे सवाल

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बिहार जाने की योजना बनाई है, लेकिन छात्रों के आंदोलन में उनका स्वागत नहीं होगा। राजनीतिक कारणों और महाराष्ट्र में बिहारियों के प्रति भेदभाव के चलते दिपके को बिहार के युवाओं से जुड़ने में कठिनाई हो रही है। कई छात्र समूहों ने सुझाव दिया है कि दिपके को पहले उन लोगों की आलोचना करनी चाहिए जो बिहारी छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। जानें इस मुद्दे की गहराई में क्या है।
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अभिजीत दिपके का बिहार जाने का ऐलान


कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बिहार जाने की योजना बनाई है। जंतर मंतर पर उन्होंने पहले कहा था कि वे दो दिन में बिहार पहुंचेंगे। हालांकि, आंदोलन समाप्त होने के बाद वे थोड़ी राहत लेना चाहते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि बिहार में भी छात्रों का आंदोलन जारी है, जिसमें कई शहरों में बड़े प्रदर्शन हुए हैं और पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। लेकिन दिपके के प्रति प्रदर्शनकारियों में कोई खास उत्साह नहीं है। इसके विपरीत, यह कहा जा रहा है कि अगर दिपके बिहार आते हैं, तो उनका स्वागत नहीं किया जाएगा। इसके पीछे राजनीतिक कारण भी हैं। कोई भी पार्टी या कोचिंग संस्थान नहीं चाहेगा कि दिपके बिहार में कोई आंदोलन शुरू करें। प्रशांत किशोर भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हो सकते हैं।


बिहारियों के प्रति भेदभाव का मुद्दा

दिपके का बिहार में प्रभावी होना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि वे महाराष्ट्र से आते हैं, जहां बिहारियों के साथ भेदभाव की घटनाएं आम हैं। रेलवे परीक्षा देने के लिए महाराष्ट्र जाने वाले बिहारी छात्रों को अक्सर ट्रेन से उतारकर पीटा जाता है। सरकारी कार्यालयों में काम करने वालों से लेकर ऑटो चलाने वालों तक को मराठी सीखने के लिए मजबूर किया जाता है। ऐसे में दिपके बिहार के युवाओं से जुड़ नहीं पा रहे हैं। कई छात्र समूहों ने सुझाव दिया है कि दिपके को पहले उन लोगों की आलोचना करनी चाहिए जो बिहारी छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और मराठी बोलने के लिए मजबूर करते हैं। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि नीट यूजी के बाद महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा के पेपर लीक हुए हैं, इसलिए दिपके को पहले इसके खिलाफ प्रदर्शन करना चाहिए।