अभिजीत दिपके ने 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान की शुरुआत की
जनसंपर्क अभियान का उद्घाटन
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गुरुवार को 'क्या बोलती पब्लिक' नामक एक जनसंपर्क अभियान की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों की वास्तविक समस्याओं और अपेक्षाओं को समझना है। यह घोषणा महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में दो दिवसीय कोर टीम बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई।
शिक्षा सुधार पर ध्यान केंद्रित
दिपके ने कहा कि इस अभियान का प्राथमिक ध्यान शिक्षा प्रणाली पर होगा। उनका आरोप है कि स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों की बढ़ती फीस के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आम परिवारों के लिए उपलब्ध नहीं रह गई है। उन्होंने बताया कि कई निजी स्कूलों में पहली कक्षा की वार्षिक फीस एक से दो लाख रुपये तक पहुंच गई है, और इसके अलावा डोनेशन भी देना पड़ता है। इस स्थिति में मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना कठिन हो गया है।
कॉलेज और कोचिंग फीस पर चिंता
अभिजीत दिपके ने यह भी कहा कि कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों की लगातार बढ़ती फीस परिवारों को कर्ज लेने के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी चाहती है कि उच्च शिक्षा किसी भी परिवार के लिए आर्थिक बोझ न बने। दिपके ने डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा हर नागरिक का मूल अधिकार है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह अधिकार एक लाभकारी कारोबार में बदलता दिखाई दे रहा है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन का संदर्भ
दिपके ने कहा कि हाल में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को केवल NEET या शिक्षा व्यवस्था से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उनके अनुसार, उस प्रदर्शन में लोगों का गुस्सा व्यापक राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ भी दिखाई दिया। उन्होंने यह दावा किया कि जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास कमजोर हो रहा है और चुनाव के बाद जनप्रतिनिधियों के दल बदलने जैसी घटनाएं लोगों में निराशा पैदा कर रही हैं।
न्यायपालिका पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिपके ने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों के मामलों में सुनवाई में देरी होती है, जबकि प्रभावशाली लोगों या राजनीतिक मामलों में तेजी से फैसले आते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के विभाजन या विधायकों के दल बदल से जुड़े मामलों में अदालतें शीघ्र निर्णय देती हैं, लेकिन आम नागरिकों को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, ये सभी आरोप अभिजीत दिपके के व्यक्तिगत बयान हैं और इन पर संबंधित संस्थाओं की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
