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अभिजीत दीपके ने शुरू किया 'स्कूल ठीक करो' अभियान, सरकारी स्कूलों की स्थिति पर उठाए सवाल

अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की है, जिसमें उन्होंने सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जो गरीब छात्रों को प्रभावित कर रही है। दीपके ने निजी स्कूलों की फीस सीमित करने की मांग की और सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर भी ध्यान केंद्रित करने का आश्वासन दिया। उनका अभियान न केवल शिक्षा के स्तर को सुधारने का प्रयास है, बल्कि यह ग्रामीण इलाकों के युवाओं को भी राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करने का एक प्रयास है।
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दीपके का अभियान


कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेता अभिजीत दीपके ने शनिवार को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के अपने गांव से 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की।


दीपके ने सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इसका सबसे बुरा असर गरीब छात्रों पर पड़ रहा है। उन्होंने निजी स्कूलों की फीस को सीमित करने की मांग भी की।


उन्होंने यह भी कहा कि कॉजपा सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के खिलाफ भी इसी तरह का अभियान चलाएगी। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, दीपके अपने गांव संतुक पिंपरी पहुंचे और ध्वजारोहण समारोह में भाग लिया।


इसके बाद, वह जिला परिषद के एक स्कूल गए और वहां की बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि स्कूल के शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं थी।


दीपके ने संवाददाताओं से कहा, 'भारत को आजाद हुए 80 साल हो गए हैं, और अगर सरकारी स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं है, तो देश का विकास कैसे होगा?'


उन्होंने स्कूल की खराब स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि खिड़कियां टूटी हुई हैं और छात्रों के लिए पर्याप्त बेंच नहीं हैं।


उन्होंने कहा, 'हमने एक सूची तैयार की है, जिसमें यह दर्ज किया जाएगा कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। हम महाराष्ट्र और देशभर के स्कूलों से आंकड़े जुटाएंगे और उनका संकलन करेंगे।'


दीपके ने कहा कि अभियान के अगले चरण में वह महाराष्ट्र के अन्य तालुकों के सरकारी स्कूलों में जाकर छात्रों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का मुआयना करेंगे।


उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने शिक्षा के बजट में कटौती की है और निजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है।


दीपके ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत में 94,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अधिक स्कूल खोलने की आवश्यकता है, तब स्कूल बंद करके देश को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है?


उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रही है और छात्रों को समान अवसर नहीं मिल रहे हैं।


दीपके ने कहा, 'जब तक सभी को समान अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक हम यह नहीं कह सकते कि हमारा देश विकसित हो रहा है।' छात्रों ने वीडियो बनाकर बताया कि उनके स्कूल तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़कें भी नहीं हैं। यह दर्शाता है कि सरकार सरकारी स्कूलों में सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रही है।


दीपके ने अपने गांव के स्कूल में पहुंचने के दौरान दावा किया कि उनके आने से पहले शौचालयों की सफाई की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल की टूटी खिड़कियां बैनर से ढकी गई हैं, जिस पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का चित्र है।


उन्होंने कहा कि स्कूल में पर्याप्त बेंच नहीं हैं। केवल चार बेंच हैं, जबकि छात्रों की संख्या अधिक है। यदि निजी स्कूलों में बेंच उपलब्ध हैं, तो सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं?


दीपके ने कहा कि कॉजपा सरकारी अस्पतालों की खराब स्थिति को लेकर भी अभियान चलाएगी।


उन्होंने कहा कि देश की राजनीतिक दिशा केवल शहरों के लोग तय नहीं करेंगे, बल्कि ग्रामीण इलाकों के युवाओं को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी।


दीपके ने निजी स्कूलों की फीस सीमित करने की मांग करते हुए कहा कि लोग फीस के रूप में एक से डेढ़ लाख रुपये तक दे रहे हैं। गरीब बच्चों को शिक्षा कैसे मिलेगी? इसलिए निजी स्कूलों की फीस सीमित की जानी चाहिए।


इससे पहले, दीपके ने छत्रपति संभाजीनगर में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं करने को लेकर राजनीतिक दलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अब शिक्षा को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाने और सरकारों से जवाब मांगने की आवश्यकता है।


उन्होंने ग्रामीण स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की और अभिभावकों से बुनियादी सुविधाओं का लेखा-जोखा तैयार करने और सरपंचों से स्कूलों की स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया।


उन्होंने सवाल किया, 'हमने नई संसद और नया प्रधानमंत्री आवास बना लिया, लेकिन गांवों में नए स्कूल क्यों नहीं बना पाए? क्या हम किसानों और मजदूरों के बच्चों को देश का भविष्य नहीं मानते?'