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अमित शाह ने अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर राजस्थान में प्रतिमा का अनावरण किया

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर राजस्थान के निम्बाहेड़ा में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए वंदे मातरम् के महत्व को रेखांकित किया। शाह ने अटल जी के सिद्धांतों और राष्ट्रभक्ति की चर्चा की, जिससे यह कार्यक्रम और भी महत्वपूर्ण बन गया। जानें इस कार्यक्रम की पूरी जानकारी और अमित शाह के विचार।
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रम

नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर राजस्थान के निम्बाहेड़ा में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। इस मौके पर, उन्होंने राज्य सरकार के विभिन्न विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की वीर भूमि ने सदियों से देशभक्तों के लिए वीरता का प्रतीक बनकर मुगलों को यह संदेश दिया है कि हमें कोई झुका नहीं सकता।

गृहमंत्री ने आगे कहा कि आज अटल जी की पुण्यतिथि है, और उनकी स्मृति में चित्तौड़गढ़ में उनकी प्रतिमा और भव्य स्मारक का निर्माण भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया है। इस भव्य प्रतिमा के निर्माण में शामिल सभी कार्यकर्ताओं को उन्होंने धन्यवाद दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के 80 साल बाद, लाल किले की प्राचीर पर और देशभर में ध्वजारोहण के समय पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गान हुआ। कांग्रेस ने वोट बैंक के लालच में इस गान को भुला दिया था, लेकिन मोदी जी ने इसे फिर से नया जीवन दिया है।

गृहमंत्री ने कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय पर वंदे मातरम् के गान को रोकने के लिए सोनिया गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब बंकिम बाबू का यह अमर गान फिर से सम्मानित हो रहा है, तो सोनिया जी को यह पसंद नहीं आया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेसियों में थोड़ी भी शर्म बची है, तो उन्हें बंकिम बाबू की आत्मा से माफी मांगनी चाहिए।

अटल जी के सिद्धांतों पर अडिग रहने की बात
गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि अटल जी ने हमेशा राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। वे RSS के प्रचारक बने, जनसंघ के कार्यकर्ता रहे और मात्र 33 वर्ष की आयु में बलरामपुर से सांसद बने। 1957 से 1996 तक लगभग 40 वर्षों तक वे विपक्ष में रहे, लेकिन उनका विचार हमेशा राष्ट्र पहले का रहा। उन्होंने जेल भी गए, लाठियां भी खाईं और कांग्रेस के अत्याचार भी सहन किए, लेकिन अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।