Newzfatafatlogo

अमेरिका-ईरान वार्ता में तनाव: ट्रंप के बयान से बढ़ी तल्खी

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर समाप्त हो गया है, जिसमें कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सख्त बयान ने वार्ता के माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। ईरान ने भी अपनी मांगें स्पष्ट की हैं, जिससे वार्ता की आगे की संभावनाएं संदेह में हैं। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
 | 
अमेरिका-ईरान वार्ता में तनाव: ट्रंप के बयान से बढ़ी तल्खी

अमेरिका-ईरान वार्ता का पहला चरण समाप्त


अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का पहला दौर समाप्त हो गया है। इस वार्ता में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई, और दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे। यह बैठक जिनेवा, स्विट्जरलैंड में आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में तनाव को कम करना था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति का एक बड़ा बयान सामने आया, जिसने दोनों देशों के बीच सहमति की संभावनाओं को और कम कर दिया।


बैठक में शामिल प्रमुख व्यक्ति

इस वार्ता में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ शामिल हुए, जबकि ईरान का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने किया। इस चार पक्षीय चर्चा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी भी उपस्थित थे।


ट्रंप का सख्त बयान

बैठक के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश की, तो अमेरिका उसे पूरी तरह से नष्ट कर देगा। ट्रंप ने कहा कि ऐसी स्थिति में ईरानी प्रतिनिधिमंडल अपने देश वापस नहीं लौट पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वार्ता विफल होती है, तो अमेरिका इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण कर सकता है।


ट्रंप ने एक नया प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि वहां से गुजरने वाले तेल के जहाजों से 20 प्रतिशत टैक्स वसूला जा सकता है। उनका तर्क था कि अमेरिका ने इस क्षेत्र की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं, इसलिए उसे यह राशि वापस मिलनी चाहिए।


ईरान की मांगें

ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी वार्ताकार मेहदी घोरबनजादेह ने कहा कि जब तक लेबनान की स्थिति में सुधार नहीं होता और ईरान को आर्थिक लाभ नहीं मिलता, तब तक परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं होगी। ईरान चाहता है कि अमेरिका प्रतिबंधों में ढील दे और उसकी रुकी हुई संपत्ति को वापस करे। ट्रंप की धमकियों से नाराज होकर ईरानी अधिकारियों ने फोटो खिंचवाने से मना कर दिया और बैठक छोड़कर बाहर चले गए।