अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम, कतर की मध्यस्थता से बातचीत की संभावना
युद्धविराम की घोषणा
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान ने दो दिन तक एक-दूसरे पर हमले करने के बाद युद्धविराम की घोषणा की है। कतर ने दोनों देशों के बीच संपर्क बनाए रखा और इसी के चलते यह निर्णय लिया गया। अब यह तय हुआ है कि दोनों देश फिर से बातचीत शुरू करेंगे। 17 जून को युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद, दोनों देशों के बीच दो दौर की वार्ता हो चुकी है। तीसरे दौर की वार्ता 18 जुलाई को पाकिस्तान में होने की संभावना है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान की चेतावनी
इससे पहले, दोनों देशों ने एक-दूसरे को बड़े हमलों की चेतावनी दी थी। ईरान ने इजराइल को भी चेतावनी दी थी कि यदि उसके महत्वपूर्ण ढांचे पर हमला हुआ, तो वह जवाब देगा। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलगदर ने यह चेतावनी दी।
इजराइल की प्रतिक्रिया
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ संघर्ष खत्म नहीं हुआ है और आवश्यकता पड़ने पर फिर से हमले किए जा सकते हैं। नेतन्याहू ने इजराइली वायु सेना के एक समारोह में कहा, 'अगर हमने कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान अब तक परमाणु हथियार बना चुका होता।'
ऊर्जा संकट की चेतावनी
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे ऊर्जा संकट और लंबा खिंच सकता है। एजेंसी ने कहा कि यदि दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार के सामान्य होने की उम्मीद को बड़ा झटका लग सकता है। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने भी कहा है कि होर्मुज की खाड़ी में सुरक्षा खतरा अब भी उच्चतम स्तर पर बना हुआ है।
