अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर विवाद गहराया
अमेरिका ने ईरान के फंड जारी करने से किया इंकार
वॉशिंगटन : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति अब समाप्ति की ओर बढ़ रही है। दोनों देशों ने शांति समझौते के लिए अपनी सहमति जताई है और 19 जून को जेनेवा में समझौते पर हस्ताक्षर करने की योजना बनाई है। हालांकि, इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों के बीच शर्तों को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है।
अमेरिका ने ईरान के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि समझौते पर हस्ताक्षर के बाद ईरान को उसके जमे हुए अरबों डॉलर का फंड जारी किया जाएगा। दोनों देशों के बयानों से स्पष्ट है कि समझौते की व्याख्या को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका को पहले अपने वादे पूरे करने होंगे, जबकि अमेरिका का कहना है कि ईरान को पहले अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करना होगा।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह पूरी तरह से गलत है। जब तक ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू नहीं करेगा, तब तक कोई भी फंड जारी नहीं किया जाएगा। यह प्रतिक्रिया ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी के बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगले चरण की बातचीत तभी शुरू होगी जब वॉशिंगटन पहले अपने कई वादे पूरे करेगा।
ट्रंप का बयान
ट्रंप ने कहा कि इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा। उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी दे दी है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।
समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों देश 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। यदि ऐसा होता है, तो यह 47 वर्षों में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच उच्च स्तरीय बैठक होगी। हालांकि, ईरान-अमेरिका के बीच हुए समझौते का पूरा दस्तावेज अभी जारी नहीं किया गया है।
