अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ा, मिसाइल हमले जारी
संघर्ष की गहराई
तेहरान/वॉशिंगटन : अमेरिका और ईरान के बीच का सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। संघर्ष के 12वें दिन, अमेरिकी सेना ने ईरान के विभिन्न क्षेत्रों को निशाना बनाया। सरकारी मीडिया के अनुसार, पश्चिमी ईरान के अहवाज, रामशिर और एंडिमेस्क में अमेरिकी मिसाइल हमले हुए। शालमचेह शहर में एक हमले में दो लोगों की मौत की सूचना मिली है।
अमेरिका की कार्रवाई का उद्देश्य
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों के लिए खतरा उत्पन्न करती है। अमेरिका का दावा है कि वह क्षेत्र में सुरक्षित नौवहन और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को बहाल करने के लिए कदम उठा रहा है।
ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 जुलाई को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या अन्य हथियारों से हमला करता है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में ईरान के किसी पुल या बिजली संयंत्र को निशाना बनाएगा।
ईरान की प्रतिक्रिया
ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान 'जैसे को तैसा' की नीति अपनाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के बुनियादी ढांचे पर किसी भी हमले का जवाब शक्तिशाली और निर्णायक होगा।
संघर्ष का विस्तार
दोनों देशों के बीच संघर्ष अब सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर नागरिक और बुनियादी ढांचे तक पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के बिजली संयंत्रों, पुलों और समुद्री जल को मीठा करने वाले संयंत्रों को निशाना बनाया है। वहीं, ईरान पर कुवैत और कतर के डिसेलिनेशन प्लांटों पर हमले करने के आरोप लगाए गए हैं।
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी जहाजों को निशाना बनाने की धमकी ने चिंता को और बढ़ा दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
तनाव के बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जबकि महीने की शुरुआत में यह 72 डॉलर प्रति बैरल से कम थी। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ रहा है।
अमेरिका को भी नुकसान
इस संघर्ष में अमेरिका को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। 22 जुलाई को डोवर एयर फोर्स बेस पर अमेरिकी सेना के चार जवानों के पार्थिव शरीर लाए गए। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट में बताया कि ईरान के साथ चल रहे सैन्य अभियान पर अब तक लगभग 37.5 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं।
