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अमेरिका और भारत के रक्षा संबंध: एक सतर्क दृष्टिकोण

जी-7 समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और अमेरिका के रक्षा संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत पर हमले की स्थिति में अमेरिका मदद के लिए खड़ा होगा, लेकिन क्या यह वास्तव में सच है? अमेरिका के रक्षा मंत्रालय द्वारा किए गए हालिया बदलावों ने भारत के लिए चिंता बढ़ा दी है। जानें, अमेरिका का झुकाव पाकिस्तान और चीन की ओर भारत के लिए क्या मायने रखता है और क्यों भारत को अमेरिका के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
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अमेरिका और भारत के रक्षा संबंध: एक सतर्क दृष्टिकोण

जी-7 समिट में ट्रंप का बयान

फ्रांस में आयोजित जी-7 समिट के दौरान एक पत्रकार वार्ता में जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से भारत और अमेरिका के रक्षा संबंधों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि भले ही कोई औपचारिक संधि नहीं है, लेकिन यदि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत पर कोई हमला होता है, तो अमेरिका मदद के लिए तैयार रहेगा। ट्रंप ने मोदी की प्रशंसा की, जिससे यह संदेश मिलता है कि अमेरिका भारत और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है। हालांकि, वास्तविकता कुछ और है।


अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की स्थिति

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में हिन्द प्रशांत कमान का नाम बदलकर अमेरिकी प्रशांत कमान कर दिया है। इसके साथ ही, मानचित्र में भारतीय सीमाओं को सही तरीके से नहीं दर्शाया गया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और अक्साई चीन को भारत का हिस्सा नहीं दिखाया गया है।


अमेरिकी प्रशांत कमान का कार्यक्षेत्र

यह ध्यान देने योग्य है कि अमेरिकी प्रशांत कमान का कार्यक्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है। 2018 में इसे हिन्द प्रशांत कमान का नाम दिया गया था। ट्रंप एक ओर भारत के साथ विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने संबंधों को महत्व देते दिखाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत के हितों के खिलाफ भी काम कर रहे हैं।


भारत के लिए चिंता का विषय

अमेरिका का झुकाव पाकिस्तान और चीन की ओर भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है। भारत पर टैरिफ लगाना और अब 'इंडो' शब्द को हटाना, साथ ही मानचित्र में पाक अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन को भारत का हिस्सा न दिखाना यह दर्शाता है कि अमेरिका एक भरोसेमंद मित्र नहीं है। भारत को अमेरिका के प्रति सतर्क रहना आवश्यक है।


मुख्य संपादक का विचार


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक।