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अमेरिका का ईरान पर नया प्रतिबंध: 27 एयरलाइंस को निशाना बनाया

अमेरिका ने ईरान के एविएशन सेक्टर पर दबाव बढ़ाते हुए 27 एयरलाइंस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इस कदम के पीछे ईरान की वाणिज्यिक एयरलाइंस पर आतंकवाद और हथियारों की तस्करी में संलिप्तता का आरोप है। ईरान ने इस पर कड़ा जवाब देते हुए अपने अधिकारों की रक्षा करने की बात कही है। जानें इस स्थिति का क्या प्रभाव पड़ेगा और ईरान का क्या रुख है।
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अमेरिका का कड़ा कदम

वॉशिंगटन: अमेरिका ने ईरान के एविएशन सेक्टर पर दबाव बढ़ाते हुए 27 एयरलाइंस को अपने 'स्पेशली डिजाइनेटेड नेशनल्स' (एसडीएन) सूची में डालकर उन पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कदम से अमेरिका ने ईरान की प्रमुख एयरलाइंस को निशाने पर लिया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।


आतंकवाद और हथियारों की तस्करी का आरोप

अमेरिकी वित्त विभाग ने कहा है कि ईरान की वाणिज्यिक एयरलाइंस लंबे समय से अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों में संलग्न रही हैं। अधिकारियों का आरोप है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) इन एयरलाइंस का उपयोग अवैध हथियारों की खरीद और उनके परिवहन के लिए करती रही है। अमेरिका ने 2011 में 'महान एयर' पर पहली बार कार्रवाई की थी, और अब पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की योजना बनाई गई है।


विदेशी कंपनियों पर भी कार्रवाई

नए प्रतिबंधों में ईरान की फ्रंट कंपनियों और विदेशी बिचौलियों को भी शामिल किया गया है। अमेरिका ने उन मार्गों को बंद कर दिया है जिनसे अमेरिकी मूल के विमान और संवेदनशील तकनीक हासिल की जा रही थी। तुर्किये, मलेशिया और कजाकिस्तान की चार कंपनियों पर भी कार्रवाई की गई है, जो ईरान को कार्गो और सेल्स सपोर्ट प्रदान कर रही थीं। इसके अलावा, ईरान के ऊपर से उड़ान भरने और अमेरिकी विमानों को ईरान ले जाने की कई मंजूरियां निलंबित कर दी गई हैं।


ईरान का कड़ा जवाब

अमेरिका के इस निर्णय के बाद, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्‍कीयन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा युद्ध के खिलाफ रहा है और पश्चिम एशिया में शांति का समर्थन करता है, लेकिन अपने अधिकारों और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान हर आक्रमण का मजबूती से सामना करेगा और विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक आक्रमणकारी अपने कार्यों पर पछताने के लिए मजबूर न हो जाएं।