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अमेरिका का चाबहार बंदरगाह पर हमला: भारत के लिए बढ़ी चिंताएं

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच, अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह पर एक बड़ा सैन्य हमला किया है, जो भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस हमले में कम से कम तीन मिसाइलें दागी गईं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। चाबहार, जो भारत के लिए एक रणनीतिक महत्व रखता है, अब नए खतरे का सामना कर रहा है। जानें इस हमले के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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अमेरिका-ईरान संघर्ष में नया मोड़

अमेरिका-ईरान युद्ध: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच, अमेरिका ने ईरान पर एक और बड़ा सैन्य हमला करने का दावा किया है। इस बार चाबहार बंदरगाह को निशाना बनाया गया है, जहां भारत ने कई वर्षों से महत्वपूर्ण निवेश किया है। अमेरिकी हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार को चाबहार पोर्ट पर कम से कम तीन मिसाइलें दागी गईं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए कई वीडियो में बंदरगाह के आस-पास धुएं के गुबार और धमाकों के बाद के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।



निगरानी टॉवर के ध्वस्त होने का दावा, ईरान ने नहीं की पुष्टि

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमले में बंदरगाह का एक निगरानी टॉवर पूरी तरह से नष्ट हो गया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी सोशल मीडिया पर हमले से संबंधित तस्वीरें साझा की हैं। वायरल वीडियो में एक ऊंची संरचना गिरती हुई दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, ईरानी मीडिया ने चाबहार क्षेत्र में लगातार तीसरे दौर के हमलों की पुष्टि की है, लेकिन निगरानी टॉवर के गिरने के दावे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।


लगातार छठी रात अमेरिकी बमबारी

चाबहार पर हमले से पहले भी अमेरिका ने ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से लगातार छठी रात भी कई ठिकानों पर कार्रवाई की गई। ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि हालिया हमलों में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 22 जून से फिर से शुरू हुई इस लड़ाई में अब तक 38 लोगों की जान जा चुकी है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं।


चाबहार पोर्ट का भारत के लिए महत्व

चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और भारत की रणनीतिक योजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और आगे यूरोप तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है। इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के लिए भी चाबहार बेहद महत्वपूर्ण है। इस परियोजना के माध्यम से भारत, ईरान और रूस सहित कई देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने की योजना है।



मोदी सरकार का बड़ा निवेश

2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान, भारत ने ईरान और अफगानिस्तान के बीच हुए समझौते के तहत चाबहार पोर्ट के विकास और संचालन के लिए लगभग 55 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। इसके बाद से यह बंदरगाह भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय संपर्क रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा बन गया है। चाबहार पर हुए हालिया हमले ने न केवल पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को और गंभीर बना दिया है, बल्कि भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को लेकर नई चिंताएं भी उत्पन्न की हैं।