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अमेरिका ने पाकिस्तान का समर्थन किया, अफगानिस्तान पर हमलों को बताया आत्मरक्षा

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिका ने पाकिस्तान के समर्थन में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान के आतंकवादी हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करने के अधिकार का समर्थन किया है। इस बीच, दोनों देशों के बीच हिंसक झड़पें जारी हैं, जिसमें हाल के हवाई हमलों में नागरिकों की मौतें हुई हैं। अमेरिका का यह बयान पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन माना जा रहा है, जो अफगान तालिबान को एक आतंकवादी संगठन के रूप में देखता है।
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अमेरिका का पाकिस्तान के प्रति समर्थन

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और सीमा पर हो रही हिंसक झड़पों के बीच, अमेरिका ने पाकिस्तान के समर्थन में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि वह आतंकवादी हमलों से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के पाकिस्तान के अधिकार का समर्थन करता है। विभाग ने यह भी कहा, “पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद का शिकार रहा है और वहां के नागरिकों ने आतंकवादी हमलों में भारी नुकसान उठाया है।”


फरवरी से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ता जा रहा है। 21 फरवरी को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार, पकतीका और खोस्त प्रांतों में हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में अफगान पक्ष ने भी कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच हिंसक झड़पें जारी हैं।


संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 27 जून को पाकिस्तान द्वारा अफगान सीमा क्षेत्र में किए गए हवाई हमलों में कम से कम 28 नागरिकों की मौत हुई, जबकि 49 अन्य घायल हुए। यह कार्रवाई कराची स्थित सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर हुए हमले के बाद की गई थी, जिसमें तीन पाकिस्तानी जवान मारे गए थे। पाकिस्तान ने इस हमले के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े संगठन ‘जमात-उल-अहरार’ को जिम्मेदार ठहराया था।


27 जून की कार्रवाई के बाद, अफगान तालिबान ने दावा किया कि उसने पाकिस्तानी क्षेत्र में जवाबी हवाई हमले किए हैं। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि उसकी सेना ने बलूचिस्तान में चार ड्रोन मार गिराए और इसके बाद अफगानिस्तान के पक्तिया, पकतीका और कुनार प्रांतों में हवाई अभियान चलाकर तालिबान के हथियारों और गोला-बारूद के ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच तनाव फिलहाल चरम पर बना हुआ है और तालिबान ने पाकिस्तान की कार्रवाई का जवाब देने की चेतावनी दी है।


अमेरिकी बयान को पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन अफगान तालिबान को अब भी एक आतंकवादी संगठन के रूप में देखता है। इसके अलावा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा व्हाइट हाउस लौटने के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में सुधार देखने को मिला है। पाकिस्तान, अमेरिका और इजराइल से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर भी मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश करता रहा है।


पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल ऐसे उग्रवादी संगठन कर रहे हैं, जो पाकिस्तान में हमलों को अंजाम देते हैं। दूसरी ओर, अफगान तालिबान इन आरोपों को खारिज करते हुए कहता है कि पाकिस्तान में बढ़ती उग्रवादी गतिविधियां उसकी आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा मामला हैं और इसके लिए अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।