अमेरिका ने भारतीय आईटी कंपनियों पर लगाया स्थायी श्रम प्रमाणन प्रतिबंध
अमेरिकी प्रशासन का नया कदम
डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारतीय आईटी कंपनियों को एक नई चुनौती दी है। अमेरिका ने टीसीएस, विप्रो और इन्फोसिस जैसी प्रमुख कंपनियों को अपने स्थायी श्रम प्रमाणन (PERM) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। इस निर्णय के बाद, विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमें कुछ कंपनियों के लिए स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम के संबंध में अमेरिकी श्रम विभाग के निर्णय की जानकारी है। यह महत्वपूर्ण है कि PERM, H-1B वीजा कार्यक्रम से अलग है। PERM आवेदनों का निलंबन H-1B वीजा की वैधता या H-1B वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं डालता है। हालांकि, इससे प्रभावित कंपनियों के योग्य कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास या ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है।'
भारत और अमेरिका के लिए टैलेंट मोबिलिटी का महत्व
टैलेंट मोबिलिटी से भारत-अमेरिका दोनों को फायदा
विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि टैलेंट मोबिलिटी दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है। यह भारतीय पेशेवरों के लिए नए अवसर उत्पन्न करता है और अमेरिकी कंपनियों को उत्कृष्ट प्रतिभा, नवाचार, अनुसंधान, उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और रोजगार सृजन में मदद करता है।
अमेरिका के कदमों पर चिंता
अमेरिका के कदम साझा हितों को नहीं बढ़ते
विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका में शेयरधारकों की संपत्ति बढ़ाने के अलावा, यह दोनों देशों के लिए आपसी लाभ का क्षेत्र है। हमें उम्मीद है कि इस प्रक्रिया में शामिल सभी पक्ष इस तथ्य को समझेंगे। अमेरिका के हालिया कदम दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षाओं को आगे नहीं बढ़ाते हैं। हम इस मुद्दे पर हो रही गतिविधियों पर ध्यान दे रहे हैं।
जेडी वैंस की टिप्पणी पर भारत की प्रतिक्रिया
जेडी वैंस की टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक
भारत ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हम मानते हैं कि ऐसी टिप्पणियाँ अनुचित हैं और यह तथ्य नजरअंदाज करती हैं कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर अत्यधिक शिक्षित और कुशल हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और नवाचार में योगदान देते हैं। वास्तव में, अमेरिका का इतिहास आप्रवासियों की पीढ़ियों द्वारा आकारित हुआ है। उनकी मेहनत और नवाचार ने विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसी भाषा का उपयोग करना, जिसमें दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक संदर्भ हो, अत्यंत आपत्तिजनक है।'
