अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ड्रोन आयात पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की
ड्रोन आयात पर नए शुल्क का ऐलान
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मानवरहित ड्रोन और उनके पुर्जों पर 100 प्रतिशत तक नए शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से उठाया गया है, जिसका उद्देश्य ड्रोन के क्षेत्र में विदेशी आपूर्तिकर्ताओं, विशेषकर चीन पर निर्भरता को कम करना है।
व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि नए नियमों के तहत कुछ विशेष प्रकार के मानव रहित विमान प्रणालियों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। इसमें 25 किलोग्राम से अधिक वजन वाले बड़े ड्रोन और वे सिस्टम शामिल हैं जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संवेदनशील क्षमताएं हैं।
इन क्षमताओं में थर्मल इमेजिंग और डॉकिंग स्टेशन जैसी तकनीकें शामिल हैं, जो उन्नत ड्रोन संचालन में उपयोग की जाती हैं। छोटे ड्रोन पर नई नीति के तहत 25 प्रतिशत का कम टैरिफ लागू होगा।
व्हाइट हाउस ने बताया कि इन टैरिफ का उद्देश्य अमेरिका में ड्रोन और उनके पुर्जों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना है। प्रशासन का मानना है कि ये कदम विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता को कम करेंगे और अमेरिका में एक मजबूत ड्रोन निर्माण उद्योग को विकसित करने में मदद करेंगे।
वर्तमान में, दुनिया के ड्रोन बाजार में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका है। कई अध्ययनों के अनुसार, 2006 में स्थापित चीनी कंपनी डीजीआई ने हाल के वर्षों में वैश्विक ड्रोन बाजार का दो तिहाई से अधिक हिस्सा अपने कब्जे में ले लिया है।
नए अमेरिकी टैरिफ ऐसे समय में आए हैं जब वाशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है, खासकर उन्नत तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में। अधिकांश नए टैरिफ शुल्क 3 सितंबर से लागू होने की संभावना है।
यह घोषणा चीन के हालिया कदम के बाद आई है, जब बीजिंग ने अमेरिका को ड्रोन निर्यात पर पाबंदियां लगाने का ऐलान किया और छह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया। चीन ने कहा कि यह कदम वाशिंगटन द्वारा जबरन श्रम और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित व्यापार प्रतिबंधों के जवाब में उठाया गया है।
इन नए उपायों के साथ, ड्रोन और उससे जुड़े पुर्जे भी दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार प्रतिबंधों से प्रभावित उत्पादों की बढ़ती सूची में शामिल हो गए हैं।
वाशिंगटन का कहना है कि नए टैरिफ घरेलू उत्पादन को मजबूत करेंगे और आयातित ड्रोन तकनीक पर निर्भरता को कम करेंगे। वहीं, यह विवाद व्यापार, तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा रहा है।
