अमेरिकी संसद में एच-1बी वीजा से ग्रीन कार्ड का रास्ता बंद करने का प्रस्ताव
वीजा अवधि में कटौती का प्रस्ताव
H-1B वीजा की अवधि में कमी का प्रस्ताव
अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी सपनों का पीछा कर रहे तकनीकी विशेषज्ञों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय सामने आया है। अमेरिकी संसद में एक नया आव्रजन विधेयक प्रस्तुत किया गया है, जिसके अनुसार यदि यह कानून बनता है, तो एच-1बी वीजा से ग्रीन कार्ड प्राप्त करने का पारंपरिक मार्ग हमेशा के लिए बंद हो सकता है।
बिल के प्रमुख प्रावधान
यह विधेयक, जिसे रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने पेश किया है, एच-1बी वीजा की अवधि को 6 साल से घटाकर केवल 2 साल करने का प्रस्ताव रखता है। इसके साथ ही, वीजा धारकों के वेतन संबंधी नियमों को भी कड़ा किया जाएगा। यह बिल भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिका में कार्यरत विदेशी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बन सकता है।
डुअल इंटेंट नियम का अंत
इस विधेयक का सबसे विवादास्पद प्रावधान एच-1बी वीजा के डुअल इंटेंट नियम को समाप्त करना है। वर्तमान में, एच-1बी वीजा धारक अमेरिका में काम करते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। नए प्रस्ताव के अनुसार, आवेदकों को यह साबित करना होगा कि उनका स्थायी निवास अमेरिका के बाहर है और वे उसे छोड़ने का इरादा नहीं रखते। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रावधान लागू होता है, तो एच-1बी से ग्रीन कार्ड प्राप्त करना लगभग असंभव हो जाएगा।
एच-1बी कर्मचारियों के लिए नए नियम
- एच-1बी कर्मचारियों को 75वें प्रतिशत के अनुसार उच्च वेतन देना होगा।
- कंपनियों को पहले यह साबित करना होगा कि योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं।
- नौकरी के विज्ञापन सरकारी प्लेटफॉर्म पर डालने होंगे।
- यदि कोई अमेरिकी उम्मीदवार समान या बेहतर योग्य है, तो उसे प्राथमिकता देनी होगी।
- किसी कंपनी में गैर-आप्रवासी कर्मचारियों की संख्या कुल कार्यबल के 5% से अधिक नहीं हो सकेगी।
- एच-1बी आवेदन से एक वर्ष पहले तक संबंधित पदों पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी नहीं की जा सकेगी।
भारतीयों पर प्रभाव
भारत एच-1बी वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में लगभग 4 लाख नए एच-1बी वीजा स्वीकृत हुए, जिनमें से करीब 2.83 लाख भारतीय नागरिकों को मिले। यह कुल स्वीकृत वीजा का लगभग 71% है। इसके अलावा, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड श्रेणियों में 12.6 लाख से अधिक भारतीय, अपने परिवारों सहित, प्रतीक्षा सूची में हैं।
