Newzfatafatlogo

अयोध्या अधिवक्ता संघ का ऐतिहासिक निर्णय: राम जन्मभूमि दान चोरी मामले में नहीं होगी पैरवी

अयोध्या अधिवक्ता संघ ने राम जन्मभूमि दान चोरी मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसमें उन्होंने आरोपियों की पैरवी नहीं करने का ऐलान किया है। संघ ने कहा है कि यदि कोई अधिवक्ता बचाव में वकालतनामा दाखिल करता है, तो उसे भारी जुर्माना देना होगा। इसके अलावा, संघ ने सीबीआई जांच की मांग की है और स्थानीय संत-महंतों की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। जानें इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 | 

अयोध्या अधिवक्ता संघ का निर्णय

उत्तर प्रदेश: राम जन्मभूमि दान चोरी के मामले में अयोध्या अधिवक्ता संघ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। संघ ने घोषणा की है कि उसके किसी भी अधिवक्ता द्वारा इस मामले में नामजद आरोपियों का बचाव नहीं किया जाएगा। यदि कोई अधिवक्ता बचाव पक्ष की ओर से वकालतनामा प्रस्तुत करता है, तो उसे प्रत्येक आरोपी के नाम पर 5 लाख रुपये संघ में जमा करने का प्रस्ताव रखा गया है।


अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने के लिए लगभग 15 अधिवक्ताओं की एक विशेष पैनल कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी को चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। संघ का कहना है कि यदि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो न्यायालय के माध्यम से इन तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कराने का प्रयास किया जाएगा।


अधिवक्ता संघ ने SIT जांच पर भी सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। इसके लिए केंद्र सरकार को पत्र भेजा जाएगा। यदि इलाहाबाद में लंबित याचिका से सीबीआई जांच का आदेश नहीं मिलता है, तो अधिवक्ता संघ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा।


संघ का कहना है कि उसे संदेह है कि अब तक बनाए गए सभी आरोपी असली दोषी हैं या नहीं। उनका मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच केवल केंद्रीय एजेंसी ही कर सकती है। इसके साथ ही, राम जन्मभूमि से जुड़े मामलों में स्थानीय संत-महंतों और लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है, ताकि जांच अधिक पारदर्शी हो सके। अधिवक्ता संघ ने यह भी निर्णय लिया है कि वह इस मामले में अभियोजन पक्ष की पैरवी सर्वोच्च न्यायालय तक अपने खर्च पर जारी रखेगा।