अयोध्या राम मंदिर दान की जांच: एसआईटी ने ट्रस्ट के अधिकारियों को अयोध्या में रहने का दिया निर्देश
राम मंदिर दान की जांच में एसआईटी की कार्रवाई
अयोध्या में राम मंदिर के दान और वित्तीय प्रबंधन में संभावित हेराफेरी की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को निर्देश दिया है कि वे जांच पूरी होने तक अयोध्या में ही रहें। यह जानकारी रविवार को मंदिर से जुड़े सूत्रों ने दी।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने लखनऊ जाने से पहले यह निर्देश जारी किए। जांच से जुड़े सभी व्यक्तियों से पूछताछ और दैनिक रिपोर्ट को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा रहा है।
रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के समक्ष पेश करने से पहले अंतिम रूप दिया जाएगा। एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है।
सबसे बड़ी अनियमितता कुंभ मेले के दौरान सामने आई, जब लगभग दो महीने में प्रतिदिन करीब 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और दान पेटियां दो घंटे में ही भर गईं।
इसलिए, एसआईटी दान की निगरानी और हिसाब-किताब की गहनता से जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी का पता चला है।
ट्रस्ट के अधिकारियों ने एसआईटी को इन आभूषणों और कीमती पत्थरों से संबंधित रिकॉर्ड पर संतोषजनक उत्तर नहीं दिया।
एसआईटी की जांच केवल धन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ट्रस्ट द्वारा विभिन्न चरणों में की गई भूमि खरीद और मंदिर के लिए निर्माण सामग्री की खरीद भी शामिल है।
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट ने बाजार मूल्य से 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर लगभग 71 एकड़ भूमि खरीदी है।
समाजवादी पार्टी (सपा) और आम आदमी पार्टी (आप) जैसे कई राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को उठाया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर दान के कथित दुरुपयोग की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।
