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अशोक खेमका को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, एम्पैनलमेंट पर उठे सवाल

हरियाणा के रिटायर्ड IAS अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस निर्णय पर सवाल उठाया है, जिसमें उन्हें अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर के लिए एम्पैनलमेंट नहीं दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि खेमका को भविष्य के असाइनमेंट के लिए एम्पैनल माना जाएगा। जानें इस मामले की पूरी कहानी और खेमका की प्रशासनिक यात्रा के बारे में।
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अशोक खेमका को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, एम्पैनलमेंट पर उठे सवाल

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

हरियाणा कैडर के पूर्व IAS अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस निर्णय पर सवाल उठाया है, जिसमें उन्हें भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर के लिए एम्पैनलमेंट नहीं दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही खेमका रिटायर हो चुके हैं, लेकिन उन्हें भविष्य के असाइनमेंट और पदों के लिए अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एम्पैनल माना जाएगा।


भेदभाव का मामला

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि जब अन्य अधिकारियों को समान परिस्थितियों में नियमों में छूट देकर एम्पैनलमेंट का लाभ दिया गया, तो खेमका को इससे अलग रखना भेदभाव होगा। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।


खेमका के खिलाफ दलीलें असफल

कोर्ट ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसने खेमका की मांग को ठुकरा दिया था। कोर्ट ने यह भी माना कि केंद्र सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि खेमका का मामला अन्य अधिकारियों से अलग क्यों था। इस प्रकार, उन्हें राहत देते हुए निर्देश दिया गया कि उन्हें अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एम्पैनल्ड माना जाए।


मामले का संक्षिप्त विवरण

1991 बैच के IAS अधिकारी अशोक खेमका लंबे समय से प्रशासनिक निर्णयों और चर्चित मामलों के कारण चर्चा में रहे हैं। 2019 में उनके बैच के अन्य अधिकारियों को भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव या सचिव के पद पर एम्पैनल किया गया था, लेकिन खेमका का नाम शामिल नहीं था। इसका कारण बताया गया कि उन्होंने केंद्र सरकार में डिप्टी सचिव या उससे ऊपर के पद पर न्यूनतम 3 साल की नियुक्ति की शर्त को पूरा नहीं किया।


खेमका की जीत का कारण

अशोक खेमका ने इस मामले में कोर्ट का रुख किया। उनके वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि सरकार खेमका के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने ऐसे 20 अधिकारियों की सूची पेश की, जिन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का जीरो अनुभव होने के बावजूद नियमों में छूट देकर एम्पैनल किया गया था। कोर्ट ने माना कि अधिकारियों को छूट दी गई थी, इसलिए खेमका के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।


अशोक खेमका का प्रशासनिक करियर

अशोक खेमका ने 33 वर्षों तक भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में कार्य किया है। 12 साल पहले, उन्होंने एक विवादास्पद लैंड डील को रद्द किया था, जो रॉबर्ट वाड्रा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से जुड़ी थी। अपने करियर में 50 से अधिक तबादले झेलने वाले खेमका को हर सरकार से शिकायत रही है।