Newzfatafatlogo

असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई: नागरिकता का मामला

असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई तेज हो गई है। गुवाहाटी के अमीनुल हक ने अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कई दस्तावेज पेश किए, लेकिन अदालत ने उन्हें विदेशी करार दिया। यह मामला तब चर्चा में आया जब विदेश मंत्रालय ने भारतीय पासपोर्ट को केवल यात्रा दस्तावेज बताया। असम में नागरिकता सत्यापन की प्रक्रिया सख्त हो गई है, जिससे कई लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने में कठिनाई हो रही है।
 | 

असम में घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कदम

असम सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई कर रही है। इस प्रक्रिया में कई लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गुवाहाटी के निवासी अमीनुल हक ने अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए 15 दस्तावेज प्रस्तुत किए। इनमें 1951 का एनआरसी रिकॉर्ड, 1966 से वोटर लिस्ट, भूमि के कागजात, पैन कार्ड, वोटर आईडी और स्कूल के रिकॉर्ड शामिल थे, लेकिन वह अपनी नागरिकता साबित करने में असफल रहे।


अदालत का निर्णय

गौहाटी हाईकोर्ट ने अमीनुल हक को विदेशी घोषित कर दिया है। अदालत ने कहा कि वह विदेशी अधिनियम की धारा 9 के तहत अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए। जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस शमीमा जहां की बेंच ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।


मामले का विवरण

अमीनुल हक ने 2019 के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें विदेशी करार दिया गया था। उनका दावा था कि वह भारत में जन्मे नागरिक हैं और उनके परिवार की उपस्थिति 24 मार्च 1971 से पहले असम में थी।


नागरिकता खारिज करने के कारण

कोर्ट ने पाया कि पैन कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता के प्रमाण नहीं माने जा सकते। 1951 के एनआरसी के कंप्यूटर जनरेटेड एक्सट्रैक्ट को भी कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं माना गया, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के लिए आवश्यक प्रमाणीकरण नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि दस्तावेजों में व्यक्ति और उनके पूर्वजों के बीच स्पष्ट संबंध स्थापित नहीं हो सका।


दस्तावेजों में खामियां

दस्तावेजों में माता-पिता और दादा-दादी के नामों की स्पेलिंग में भिन्नता, उम्र, परिवार के सदस्यों और पतों में विसंगतियां पाई गईं। अमीनुल हक ने इसे लिपिकीय त्रुटि बताया और ब्रह्मपुत्र नदी के कटाव के कारण गांव बदलने का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने कहा कि इन दावों को मौजूदा दस्तावेजों के आधार पर साबित नहीं किया जा सका।


अदालत की सुनवाई

अमीनुल हक के पिता भी अदालत में पेश हुए और उन्होंने गवाही दी। हालांकि, अदालत ने मौखिक गवाही को खारिज कर दिया क्योंकि दावे को समर्थन देने वाले दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। अदालत ने 2019 के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।


फैसले का महत्व

यह निर्णय उस समय आया है जब विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं। असम में नागरिकता सत्यापन की प्रक्रिया बेहद सख्त हो गई है, जिसके कारण लोगों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है। नागरिकता साबित करने में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, और केवल सरकारी आईडी या पुराने रिकॉर्ड पर्याप्त नहीं माने जा सकते।