आकाश गुप्ता: 13 हजार की नौकरी से 3000 करोड़ की कंपनी तक का सफर
आकाश गुप्ता की प्रेरणादायक कहानी
नई दिल्ली - आकाश गुप्ता, जो कभी 13 हजार रुपये प्रति माह की नौकरी करते थे, अब Zypp Electric के सह-संस्थापक और CEO हैं, जिसकी वैल्यूएशन लगभग 3,000 करोड़ रुपये है। यह कंपनी हरे रंग के इलेक्ट्रिक स्कूटरों के माध्यम से लास्ट-माइल डिलीवरी में सक्रिय है और तेजी से अपने व्यवसाय का विस्तार कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि आकाश ने एक करोड़ रुपये की सालाना नौकरी छोड़कर अपना व्यवसाय शुरू किया, लेकिन उनका पहला स्टार्टअप असफल रहा।
इस असफलता ने Zypp Electric की नींव रखी। जब आकाश और उनकी सह-संस्थापक राशि अग्रवाल ने Shark Tank India में अपने बिजनेस आइडिया को पेश किया, तो उन्हें वहां कोई डील नहीं मिली।
बचपन की कठिनाइयों से मिली प्रेरणा
चौथी कक्षा में मिले एक थप्पड़ ने बदल दी सोच
आकाश का बचपन जयपुर के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में बीता। उनके पिता सरकारी डॉक्टर थे और मां गृहिणी। बचपन में आकाश पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं थे।
कहा जाता है कि चौथी कक्षा में परीक्षा में उन्हें 100 में से केवल 44 अंक मिले। इस पर उनकी मां निराश हुईं और घर लौटने पर उन्हें डांट और थप्पड़ भी मिला। यह घटना उनके लिए एक सबक बन गई।
आकाश ने उस दिन समझा कि जीवन में कुछ हासिल करने के लिए मेहनत करनी होगी और जिम्मेदारियों को समझना होगा।
शुरुआत और करियर की प्रगति
₹13 हजार की नौकरी से करियर की शुरुआत
इंजीनियरिंग के बाद आकाश ने Infosys में नौकरी शुरू की, जहां उनकी शुरुआती सैलरी 13 हजार रुपये थी। इस दौरान उनके कई दोस्त IIT से पढ़ाई करके लाखों रुपये के पैकेज पर नौकरी कर रहे थे।
आगे बढ़ने के लिए उन्होंने MBA करने का निर्णय लिया और IMT गाजियाबाद में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में लगभग एक दशक तक काम किया।
इस दौरान उन्होंने Dell, MobiKwik और Airtel जैसी कंपनियों में काम किया और उनका करियर तेजी से आगे बढ़ा।
स्टार्टअप की शुरुआत और असफलता
₹1 करोड़ का पैकेज छोड़ा, शुरू किया स्टार्टअप
कॉरपोरेट करियर में एक समय आकाश का सालाना पैकेज 1 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। फिर भी, उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू करने की इच्छा नहीं छोड़ी।
उन्होंने अपनी पत्नी राशि अग्रवाल के साथ मिलकर Mobycy नाम से साइकिल शेयरिंग का व्यवसाय शुरू किया, लेकिन यह असफल रहा।
आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए, उन्हें अपने व्यवसाय के लिए पर्चे बांटने पड़े।
Zypp Electric का उदय
असफलता से निकला Zypp Electric का आइडिया
Mobycy की असफलता के बाद आकाश ने हार नहीं मानी और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख किया।
यहीं से Zypp Electric की शुरुआत हुई, जिसने इलेक्ट्रिक स्कूटरों के माध्यम से कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए लास्ट-माइल डिलीवरी का काम शुरू किया।
आकाश और उनकी टीम ने धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों का नेटवर्क बढ़ाया और डिलीवरी पार्टनर्स को इससे जोड़ा।
Shark Tank India पर अस्वीकृति
Shark Tank India से भी नहीं मिली डील
जब Zypp Electric की टीम Shark Tank India में गई, तो उन्होंने 220 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन पर 1 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले 2.2 करोड़ रुपये की मांग की।
हालांकि, शार्क्स के साथ बातचीत के बाद उन्हें कोई निवेश प्रस्ताव नहीं मिला।
वर्तमान में कंपनी की सफलता
आज हजारों करोड़ की वैल्यूएशन
Shark Tank India से डील नहीं मिलने के बावजूद Zypp Electric की ग्रोथ जारी रही। कंपनी ने कई निवेशकों से फंडिंग जुटाई और अपने कारोबार का विस्तार किया।
कंपनी ने अब तक लगभग 76.5 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है और मार्च 2025 तक इसकी वैल्यूएशन लगभग 331 मिलियन डॉलर यानी 3,000 करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है।
रोजगार के अवसर
हजारों डिलीवरी पार्टनर्स को मिला रोजगार
आज Zypp Electric लास्ट-माइल डिलीवरी के क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग कर रही है। कंपनी के प्लेटफॉर्म से जुड़े हजारों डिलीवरी पार्टनर्स इसके नेटवर्क का हिस्सा हैं।
आकाश गुप्ता का कहना है कि उनका जुड़ाव उन गिग वर्कर्स से है, जो मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं और अपने परिवार की बेहतर जिंदगी के लिए मेहनत करने को तैयार रहते हैं।
आकाश की कहानी यह दर्शाती है कि एक असफलता, नौकरी छोड़ने का जोखिम और निवेशकों से मिली अस्वीकृति किसी सफर का अंत नहीं होती। सही दिशा में मेहनत करने से वही असफलता आगे चलकर बड़ी सफलता की नींव बन सकती है।
