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आजादी की 80वीं वर्षगांठ पर वंदे मातरम् विवाद: कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप

आजादी की 80वीं वर्षगांठ पर वंदे मातरम् गाने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने सोनिया गांधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने वंदे मातरम् गा रहे लोगों को रोकने का प्रयास किया। कांग्रेस ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि कोई व्यवधान नहीं हुआ। जयराम रमेश ने 1937 की एक महत्वपूर्ण बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि वंदे मातरम् गाने का निर्णय तब लिया गया था। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।
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आजादी की 80वीं वर्षगांठ का उत्सव

देश आज अपनी स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से तिरंगा झंडा फहराया। सभी राज्यों की राजधानियों में भी मुख्यमंत्रियों ने तिरंगा लहराया। इसी दिन कांग्रेस मुख्यालय में भी तिरंगा फहराया गया, जहां पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की उपस्थिति में वंदे मातरम् गाया गया। हालांकि, इस अवसर पर विवाद उत्पन्न हो गया है।


बीजेपी का आरोप

बीजेपी ने सोनिया गांधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने वंदे मातरम् गा रहे लोगों को रोकने का प्रयास किया। पार्टी के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि जब वंदे मातरम् गाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी कथित रूप से नाराज हो गईं। बीजेपी ने सवाल उठाया कि सोनिया गांधी को वंदे मातरम् से इतनी नफरत क्यों है?


कांग्रेस का स्पष्टीकरण

कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों का खंडन किया है। महासचिव जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् के दौरान कोई व्यवधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस विषय पर कोई विवाद नहीं है।


1937 की ऐतिहासिक बैठक का संदर्भ

जयराम रमेश ने बताया कि अक्टूबर 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी और पंडित नेहरू शामिल थे। इस बैठक में रवींद्रनाथ ठाकुर की सलाह पर यह निर्णय लिया गया था कि वंदे मातरम् कांग्रेस अधिवेशनों में गाया जाएगा। तब से कांग्रेस के कार्यकर्ता वंदे मातरम् गाते आ रहे हैं।


अशोक गहलोत का स्पष्टीकरण

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मुद्दे पर स्पष्टता दी है कि वंदे मातरम् को लेकर कोई विवाद नहीं है। वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी इस पर सवाल उठाए हैं।