आयुष्मान आरोग्य मंदिर: स्वास्थ्य सेवाओं का नया अध्याय
आयुष्मान आरोग्य मंदिर का नया नामकरण
14 अप्रैल 2018 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजापुर के जागला से आयुष्मान भारत, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (AB-HWC) की शुरुआत की थी। हालांकि, नवंबर 2023 में सरकार ने इन केंद्रों का नाम बदलने का निर्णय लिया है। अब इनका नया नाम 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' होगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का नाम बदलकर 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' रख दिया है। इसके साथ ही, इन मंदिरों की टैगलाइन 'आरोग्यम् परमं धनम्' भी निर्धारित की गई है। इस नामकरण के बाद, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इनका निर्माण जारी है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थिति
31 जुलाई को संसद में सांसद मालविका देवी और नलिन सरोज ने स्वास्थ्य मंत्रालय से पूछा कि देश में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि कितने मंदिर स्वीकृत और चालू हैं, और पिछले तीन वर्षों में कितनी राशि आवंटित की गई है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की संख्या
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि 30 जून 2026 तक देश में 1,86,298 आयुष्मान आरोग्य मंदिर चालू होंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत राज्यों को स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार वित्तीय सहायता दी जा रही है। वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक केंद्र सरकार ने हजारों करोड़ रुपये जारी किए हैं।
सरकार की योजनाएं
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि सरकार इन मंदिरों को और मजबूत करने की योजना बना रही है। विशेष रूप से आकांक्षी जिलों, ग्रामीण, आदिवासी और कम सुविधा वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत नए भवनरहित आरोग्य मंदिर और शहरी आरोग्य मंदिर बनाए जा रहे हैं। इन मंदिरों में 12 प्रकार की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उपलब्ध सुविधाएं
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर 179 दवाएं मुफ्त में उपलब्ध हैं। 63 प्रकार की जांच भी मुफ्त में कराई जा सकती हैं। सब-हेल्थ सेंटर स्तर पर 113 दवाएं और 14 जांच उपलब्ध कराई जा रही हैं। डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के खाली पद भरे जा रहे हैं।
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का सुधार
स्वास्थ्य केंद्रों को डिजिटल बनाया जा रहा है। स्वस्थ भारत पोर्टल और दवा वितरण प्रबंधन प्रणाली से दवाओं की कमी नहीं होगी। सभी मंदिरों में टेलीकंसल्टेशन की सुविधा उपलब्ध है, जिससे ग्रामीण लोग घर के पास ही विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। 1,546 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स दूर-दराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रही हैं।
राज्यों की प्रगति
- उत्तर प्रदेश: 23,646
- राजस्थान: 14,494
- महाराष्ट्र: 13,457
- पश्चिम बंगाल: 13,517
- मध्य प्रदेश: 12,775
- बिहार: 12,444
- गुजरात: 10,625
- कर्नाटक: 10,137
- ओडिशा: 7,379
- छत्तीसगढ़: 5,898
कम आयुष्मान मंदिर वाले राज्य/UT
- लक्षद्वीप: 13
- चंडीगढ़: 60
- दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव: 88
- अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह: 129
- पुडुचेरी: 133
- सिक्किम: 183
- गोवा: 310
- लद्दाख: 321
- दिल्ली: 389
- मिजोरम: 416
- मणिपुर: 420
- नागालैंड: 485
- अरुणाचल प्रदेश: 510
- मेघालय: 641
- त्रिपुरा: 1133
सरकार का खर्च
- साल 2022-23: 32,997 करोड़ रुपये
- साल 2023-24: 36,119 करोड़ रुपये
- साल 2024-25: 36,875 करोड़ रुपये
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत केंद्र सरकार राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। पिछले तीन वर्षों में केंद्र ने NHM के तहत हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
भविष्य की योजनाएं
सरकार आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को और बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। आकांक्षी जिलों, ग्रामीण, आदिवासी-बहुल और कम सुविधा वाले क्षेत्रों पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिक ध्यान देने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत 11,001 बिल्डिंग-रहित आयुष्मान आरोग्य मंदिर और 5,456 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर की योजना बनाई जा रही है।
