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आरबीआई ने ब्याज दरों में वृद्धि की, महंगाई पर काबू पाने की कोशिश

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लंबे समय बाद ब्याज दरों में वृद्धि की है, जिससे कर्ज लेना महंगा होगा। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट को 5.50% करने की घोषणा की है, जो महंगाई को नियंत्रित करने के प्रयास का हिस्सा है। इस निर्णय का प्रभाव विकास दर पर भी पड़ेगा, क्योंकि मांग में कमी आएगी। आरबीआई ने 2026-27 के लिए महंगाई दर का अनुमान 5.2% और जीडीपी विकास दर का अनुमान 7.1% रखा है। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव।
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आरबीआई की नई नीतिगत ब्याज दरें


मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लंबे समय के बाद नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि की है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद, गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% करने की घोषणा की। यह निर्णय बढ़ती महंगाई के कारण लिया गया है।


इस निर्णय के परिणामस्वरूप, बैंकों से कर्ज लेना महंगा हो जाएगा और पहले से लिए गए कर्ज की ईएमआई भी बढ़ जाएगी। महंगाई दर में वृद्धि के चलते आरबीआई को फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट बढ़ाना पड़ा है। रेपो रेट वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं। यदि आरबीआई उच्च ब्याज दर पर कर्ज देगा, तो बैंक भी अपनी ब्याज दरें बढ़ाएंगे।


ब्याज दरों में वृद्धि का विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि इससे बाजार में मांग में कमी आएगी। मांग में कमी से आपूर्ति स्थिर होगी, जिससे बाजार में वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ेगी और महंगाई दर में कमी आएगी। आरबीआई ने अपनी बैठक के बाद महंगाई दर के अनुमान को भी बढ़ाया है। अब 2026-27 में महंगाई दर 5.2% रहने का अनुमान है, जो पहले 5% था। आरबीआई ने महंगाई की औसत दर 4% निर्धारित की है और इसे 2% से 6% के बीच रखने का लक्ष्य रखा है।


हालांकि, रेपो रेट बढ़ने के बावजूद अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। आरबीआई ने 2026-27 के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। इसमें दूसरी तिमाही की विकास दर 7.2% और तीसरी तिमाही की विकास दर 6.9% रहने की उम्मीद है। चौथी तिमाही का अनुमान 6.8% पर स्थिर रखा गया है।