आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य: बारिश और कृषि का गहरा संबंध
आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य का महत्व
आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य: वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों का महत्व अत्यधिक है। आर्द्रा नक्षत्र को विशेष रूप से चौमासे में वर्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में, आर्द्रा नक्षत्र का आरंभ 22 जून से हो चुका है। यह नक्षत्र झमाझम बारिश और मानसून की सक्रियता का संकेत देता है। मान्यता है कि आर्द्रा नक्षत्र नई ऊर्जा और उर्वरता का संचार करता है, जिससे इसका कृषि जीवन से गहरा संबंध है।
अरदरा पर्व का उत्सव
‘अरदरा’ पर्व:
यह नक्षत्र केवल ज्योतिषीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मिथिला की लोक संस्कृति, कृषि परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। इसी समय मानसून की सक्रिय शुरुआत होती है और मिथिला के किसान धान की रोपाई का कार्य आरंभ करते हैं। इस मौसम में मनाया जाने वाला ‘अरदरा’ पर्व लोगों के बीच विशेष उत्साह का विषय होता है।
नाग से जुड़ी मान्यता
नाग से जुड़ी मान्यता:
पौराणिक ग्रंथों और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आर्द्रा नक्षत्र के देवता भगवान रुद्र हैं और इसके स्वामी राहु माने जाते हैं। यह नक्षत्र सांपों के प्रजनन और उनकी वृद्धि से भी जुड़ा हुआ है। मिथिला में एक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति आर्द्रा नक्षत्र के पहले चरण में खीर का सेवन करता है, उसे पूरे वर्ष सर्पदंश का भय कम रहता है। हालांकि, यह धार्मिक और लोकविश्वास पर आधारित मान्यता है।
