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आषाढ़ी गुरु पूर्णिमा पर शिरडी में भक्त ने भेंट किया 1 करोड़ का सोने का मुकुट

आज आषाढ़ी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिरडी में एक भक्त ने साईं बाबा को 1 करोड़ रुपये का सोने का मुकुट भेंट किया। इस भव्य मुकुट का वजन 642 ग्राम है और इसे बेशकीमती रत्नों से सजाया गया है। भक्तों के चेहरे पर खुशी और आश्चर्य का नजारा देखने को मिला जब इस मुकुट का पर्दा हटाया गया। यह भेंट न केवल एक आभूषण है, बल्कि अपने गुरु के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक भी है। जानें इस विशेष अवसर के बारे में और अधिक।
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गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और धूमधाम से मनाया गया

शिरडी: आज देशभर में आषाढ़ी गुरु पूर्णिमा का पर्व बड़े श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन उन गुरुओं की पूजा और वंदना के लिए समर्पित है, जो जीवन में मार्गदर्शन करते हैं। इस विशेष अवसर पर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शिरडी साईं बाबा मंदिर में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब एक भक्त ने बाबा के चरणों में एक अनमोल उपहार अर्पित किया, जिसे देखकर वहां उपस्थित सभी लोग चकित रह गए।


भक्तों के चेहरे पर खुशी का नजारा

गुरु पूर्णिमा के इस पावन दिन जब बाबा के इस शानदार उपहार से पर्पल रंग का पर्दा हटाया गया, तो मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी और आश्चर्य का भाव स्पष्ट था। यह अनोखी भेंट गुरु-दक्षिणा के रूप में समर्पित की गई है, जो इस उत्सव के पहले ही दिन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है।


मुकुट की विशेषताएँ

साईं बाबा को यह भव्य मुकुट आंध्र प्रदेश के वेल्लोर के भक्त श्रीनिवास राव ने भेंट किया है। इस सोने के मुकुट का कुल वजन 642 ग्राम है और इसकी अनुमानित कीमत लगभग 1.03 करोड़ रुपये है। मुकुट की सबसे बड़ी विशेषता इस पर की गई नवग्रहों की बारीक नक्काशी है, और इसे बेशकीमती रत्नों और अमेरिकन डायमंड्स से सजाया गया है।


मुख्य उत्सव के दिन बाबा के शीश पर सजेगा मुकुट

श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन के अनुसार, गुरु पूर्णिमा उत्सव के मुख्य दिन साईं बाबा की प्रतिमा का श्रृंगार इसी भव्य सोने के मुकुट से किया जाएगा। यह पहली बार नहीं है जब किसी भक्त ने बाबा के दरबार में इतनी कीमती भेंट अर्पित की हो; पहले भी श्रद्धालु लाखों-करोड़ों के आभूषण और दान अर्पित करते रहे हैं। हालांकि, गुरु पूर्णिमा के इस खास मौके पर समर्पित किया गया यह मुकुट केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक भक्त की अपने गुरु और ईश्वर के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है।