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इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण सामग्री के विज्ञापनों की जांच की मांग

भारत में इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित विज्ञापनों का मामला सामने आया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पार्टी ने सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापनों के माध्यम से बाल यौन शोषण सामग्री का प्रचार किया जा रहा है। बीबीसी की जांच में यह भी सामने आया है कि इन विज्ञापनों में 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सरकार की प्रतिक्रिया।
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इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री का मामला


बाल यौन शोषण सामग्री का मामला: भारत में इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित विज्ञापनों का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस मुद्दे को उठाते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पार्टी, आजाद अधिकार सेना, ने भारत सरकार के कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के प्रचार की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।


पत्र में कहा गया है कि इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापनों की जांच की जाए, जो कथित रूप से बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा देते हैं और उपयोगकर्ताओं को ऐसे प्लेटफार्मों पर ले जाते हैं जहां यह सामग्री उपलब्ध है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो ये पॉक्सो अधिनियम, 2012, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (विशेषकर धारा 67B), भारतीय न्याय संहिता, 2023 और अन्य लागू कानूनों के तहत गंभीर अपराध हैं।


इस पत्र में केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है कि सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जाए, सभी जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान की जाए, और जहां कानून का उल्लंघन हो, वहां उचित कार्रवाई की जाए।


इस पत्र की प्रतिलिपियां प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, केंद्रीय गृह सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, CERT-In, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग और उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई हैं।


मामले का विवरण


बीबीसी-आई की एक जांच में पता चला है कि इंस्टाग्राम भारत में पैसे लेकर ऐसे विज्ञापनों का प्रसार कर रहा है, जिनमें बच्चों के यौन शोषण की सामग्री का उल्लेख है। इन विज्ञापनों में 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है। उपयोगकर्ताओं को टेलीग्राम चैनल के लिंक दिए गए हैं, जहां वे इन सामग्रियों को केवल 99 रुपए में खरीद सकते हैं।


इंस्टाग्राम पर विज्ञापन तभी प्रकाशित होते हैं जब उनकी मॉडरेशन तकनीक उन्हें स्वीकृत करती है। जब मीडिया संस्थान ने ऐसे एक विज्ञापन को रिपोर्ट किया, तो 24 घंटे बाद इंस्टाग्राम ने कहा कि यह उनकी 'कम्युनिटी गाइडलाइन्स' का उल्लंघन नहीं करता। बाद में, जब इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही कई विज्ञापनों को निष्क्रिय कर दिया है और उन्हें पोस्ट करने वाले अकाउंट्स को सस्पेंड कर दिया है। कंपनी ने कहा कि मीडिया संस्थान की जांच के बाद उन्होंने और विज्ञापन हटाए हैं और अकाउंट्स को निष्क्रिय किया है।