इजरायल और लेबनान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता
पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की नई उम्मीद
दोनों देशों ने किए समझौते पर हस्ताक्षर, पश्चिम एशिया में अब स्थाई शांति की उम्मीद जगी
तेल अवीव से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते के बाद, इजरायल और लेबनान ने भी एक महत्वपूर्ण शांति समझौता किया है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस समझौते की पुष्टि की है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि इस समझौते में हिजबुल्ला शामिल नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते के बाद क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावनाएं बढ़ी हैं। हिजबुल्ला इस वार्ता का हिस्सा नहीं था। पहले भी कई संघर्षविराम समझौते हुए थे, लेकिन वे प्रभावी नहीं हो सके। लेबनान के अधिकारियों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी है, जबकि इजरायल का जोर हिजबुल्ला के निरस्त्रीकरण पर है। इस पर इजरायल के अमेरिका में राजदूत येखिएल लीटर और लेबनान की अमेरिका में राजदूत नादा हमादेह ने हस्ताक्षर किए हैं।
लेबनान के राजदूत की टिप्पणी
लेबनान की राजदूत नादा हमादेह ने कहा कि यह फ्रेमवर्क लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बहाल करने की दिशा में पहला कदम है। इसका उद्देश्य युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना है, ताकि लोग अपने घर लौट सकें और देश में शांति, सुरक्षा और समृद्धि स्थापित हो सके।
इजरायल के राजदूत का बयान
इजरायल के राजदूत येखिएल लीटर ने कहा कि इस समझौते का अंतिम लक्ष्य दोनों देशों के बीच स्थायी शांति स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि यह एक वास्तविक शांति होगी, जिसमें दोनों देश सुरक्षित रहेंगे और एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस त्रिपक्षीय समझौते में ईरान और हिजबुल्ला को अलग रखा गया है, जिससे शांति की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुला है।
