ईरान का अमेरिका पर भरोसा नहीं, शांति वार्ता जारी
ईरान की बातचीत की स्थिति
शांति समझौते पर बाले ईरानी संसद के उपसभापति, कहा, ईरान बातचीत करता रहेगा
तेहरान में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की स्थिति दोहरी है। एक ओर, दोनों देश शांति समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर, वे एक-दूसरे पर हमले भी कर रहे हैं। ईरानी संसद के उपसभापति मोजतबा निकजाद ने कहा है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उसे अमेरिका के वादों पर भरोसा नहीं है।
निकजाद ने कहा कि ईरान आवश्यकतानुसार बातचीत करेगा, लेकिन अमेरिका द्वारा किए गए किसी भी वादे पर विश्वास नहीं किया जा सकता। उन्होंने विदेशी मीडिया के दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह कहना गलत है कि ईरान केवल लड़ाई कर रहा है और बातचीत नहीं कर रहा।
विस्थापन और संघर्ष
अमेरिकी हमलों के कारण 70 लाख लोग विस्थापित हुए
उन्होंने बताया कि संघर्ष के चरम पर 70 लाख लोग विस्थापित हुए, जिनमें से कई उत्तरी ईरान में चले गए। हालांकि, सरकारी प्रबंधन के कारण किसी को भी बुनियादी सामान, रोटी या आवास की कमी नहीं हुई। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि तेहरान के जवाबी हमले अमेरिका के लिए एक सबक होना चाहिए।
आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग ने पश्चिम एशिया में हुए हमलों के बारे में एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी तेल टैंकर पर मिसाइल से हमला किया, जिससे टैंकर के इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा। आईआरजीसी ने कहा कि इस आक्रामकता के जवाब में एक जहाज को निशाना बनाया गया।
संघर्ष की शुरुआत
28 फरवरी से दोनों में चल रहा संघर्ष
यह ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी। इससे पहले अमेरिका ने कई बार ईरान को चेतावनी दी थी, लेकिन ईरान ने झुकने से इनकार कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया। पहले दिन के हमले में ईरान के कई नेता मारे गए। लेकिन ईरान ने पलटवार किया और युद्ध अभी भी जारी है। दोनों देशों को इस संघर्ष में भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
