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ईरान के खिलाफ ट्रंप की कार्रवाई पर अमेरिकी सीनेट का प्रस्ताव

अमेरिकी सीनेट ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव पारित किया है, जो 1973 के बाद का पहला मामला है। इस प्रस्ताव में ट्रंप से युद्ध समाप्त करने की मांग की गई है। इस बीच, ट्रंप को अपने ही देश में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जानें इस प्रस्ताव के पीछे की वजह और खाड़ी देशों में अमेरिका के विदेश मंत्री के दौरे की जानकारी।
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ईरान के खिलाफ ट्रंप की कार्रवाई पर अमेरिकी सीनेट का प्रस्ताव

सीनेट ने ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने का प्रस्ताव पारित किया


अमेरिकी सीनेट ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव पारित किया है। यह 1973 के बाद का पहला अवसर है जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों ने किसी राष्ट्रपति से युद्ध समाप्त करने की मांग की है।


वॉशिंगटन: अमेरिका ने 28 फरवरी 2026 को इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध की शुरुआत की थी, लेकिन यह युद्ध अमेरिका के लिए अत्यधिक महंगा साबित हुआ। लगभग तीन महीने बाद, ट्रंप ने इस युद्ध को समाप्त करने और स्थायी समझौते के लिए शांति वार्ता शुरू करने की घोषणा की।


हालांकि, तनाव अभी भी बना हुआ है और दोनों पक्षों से बयान जारी हो रहे हैं। ट्रंप को अपने इस निर्णय के लिए अपने देश में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सीनेट में 50-48 वोटों से पारित प्रस्ताव में ट्रंप से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया गया है। इससे पहले, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।


ट्रंप की पार्टी में असंतोष बढ़ता जा रहा है

1973 के वॉर पॉवर्स एक्ट के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिकी कांग्रेस ने किसी राष्ट्रपति से युद्ध जैसी कार्रवाई को समाप्त करने की मांग की है। मतदान के दौरान चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का समर्थन किया, जो ट्रंप की पार्टी में बढ़ते असंतोष को दर्शाता है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस प्रस्ताव का कोई कानूनी प्रभाव नहीं होगा और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पहले ही समाप्त हो चुकी है।


अमेरिकी विदेश मंत्री का खाड़ी देशों का दौरा

इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो यूएई, बहरीन और कुवैत के दौरे पर हैं। उनका उद्देश्य अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर खाड़ी देशों की चिंताओं को दूर करना है। इन देशों को आशंका है कि समझौते से होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का प्रभाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर कोई स्पष्ट शर्त नहीं होने से भी सवाल उठ रहे हैं।